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Wednesday, 1 November 2017

क्या इंसान एलियंस की प्रजाति है?

क्या इंसान एलियंस की प्रजाति है?

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अगर देखा जाए तो इस पृथ्वी ग्रह पर इंसान को छोड़ कर हर एक प्राणी शारीरिक तौर पर काफी ज्यादा विकसित है. हर जानवर के बच्चे जन्म लेते ही कुछ घंटे या फिर कुछ दिन बाद ही चलने-फिरने लगते हैं. लेकिन अगर वही हम इंसानों के शिशु चलने फिरने में महीनों या फिर कुछ साल लग जाते हैं.

ऐसा क्यों है? अगर हम इंसान जानवरों के समय से अगर इस पृथ्वी पर रहते आ रहे हैं. तो हम इस मामले में कैसे उनसे पीछे हो सकते हैं. यह सारी बातें यह दर्शाती हैं कि हम इस पृथ्वी के मूल निवासी नहीं है. बल्कि हमें यहां पर बायोलॉजिकल के माध्यम से किसी उन्नत सभ्यता द्वारा इस पृथ्वी पर विकशित किया गया है.

इंसान का विकास

अगर देखा जाए तो बाकी जानवरों की तुलना में हम इतने विकसित कैसे हो सकते हैं? अगर हम शारीरिक तौर पर उनसे कमजोर हैं. तो बौद्धिक तौर पर उसे इतने मजबूत कैसे हो सकते हैं? वैज्ञानिक अपना कितना भी तर्क इस बारे में दें. लेकिन कुछ ऐसी बातें हैं. जो हमें यह सोचने पर मजबूर कर देती हैं कि हो या ना हो हम इस पृथ्वी के मूल निवासी नहीं है.


क्योंकि इस दुनिया में कोई भी जानवर प्रदूषण नहीं फैलाता, सिवाय इंसान के. तो जाहिर सी बात है जैसे-जैसे हम टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में आगे बढ़ रहे हैं. वैसे-वैसे प्रदूषण भी फैलता जा रहा है. एक समय आएगा जब हम पृथ्वी के वातावरण को पूरी तरह से दूषित कर देंगे. उसके बाद हमारे पास सिर्फ यही चारा रह जाएगा कि हम किसी दूसरे ग्रह पर जाकर निवास करें.


लेकिन अगर होशियार व्यक्ति तो वह यही कहेगा कि जितना विकसित अभी हम इस समय है उतना विकसित स्टेज पर उस ग्रह पर हम निवास ना करें. क्योंकि जो विकास की अवस्था इस समय रहेगी अगर उसी विकास की अवस्था में अगर हम वहां पर निवास करेंगे. तो वहां भी प्रदूषण शुरू हो जाएगा इसलिए वही पुराना चक्र फिर से दोहराना होगा. ताकि इंसान उस ग्रह पर लंबे समय तक निवास कर सकें.

Friday, 13 October 2017

मानव मस्तिक के बारे में रोचक एवं जरूरी जानकारी

मानव मस्तिक के बारे में रोचक एवं जरूरी जानकारी (Interesting Facts About Human Brain in Hindi)

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Pic credit: dailymail.co.uk
मानव मस्तिष्क मानव शरीर में सबसे महत्वपूर्ण अंगों में से एक है। यह हमारी सोच, कारण, याद रखने और नई चीजें सीखने में सहायता करता है। वास्तव में, हमारा मस्तिष्क और उसके बेहतर कामकाज जानवरों और सर्वशक्तिमान की अन्य रचनाओं से भिन्न होता है।

मानव मस्तिष्क के बारे में 10 दिलचस्प तथ्य हैं:

  1. मानव मस्तिष्क का वजन 3 पाउंड होता है.
  2. इसमें 60% वसा शामिल है और यह मानव शरीर में श्रेष्ठ अंगों में से एक है.
  3. मानव मस्तिष्क में जागरण होने पर लगभग 23 वाट बिजली उत्पन्न करने की क्षमता होती है।
  4. हमारे शरीर में कुल रक्त और ऑक्सीजन का उत्पादन होता है, मस्तिष्क का 20% हिस्सा होता है
  5. जब मस्तिष्क को रक्त की आपूर्ति बंद हो जाती है, तो यह लगभग 8-10 सेकंड के बाद होता है कि मस्तिष्क चेतना को खोना शुरू हो जाती है।
  6. मस्तिष्क 5 से 6 मिनट तक जीवित रहने में सक्षम होती है, अगर उसे ऑक्सीजन नहीं मिल जाता है जिसके बाद वह मर जाता है
  7. मस्तिष्क में मौजूद रक्त वाहिकाओं लगभग 100,000 मील लंबा हैं
  8. मस्तिष्क में मौजूद 100 अरब न्यूरॉन्स हैं।
  9. प्रारंभिक गर्भावस्था में, न्यूरॉन्स 250,000 प्रति मिनट की खतरनाक दर से विकसित होता है।
  10.  जैसे-जैसे हम बड़े होते हैं, हम नई चीजों को याद नहीं कर सकते। अमेरिका में शोधकर्ताओं के मुताबिक यह मस्तिष्क पुरानी यादों को फ़िल्टर करने और हटाने में असमर्थ है, जो नए विचारों को अवशोषित करने से रोकते हैं।
  11. मानव मस्तिष्क का वजन केवल 3 एलबीएस का होता है। (लगभग 1.5 किलोग्राम), शरीर के वजन का सिर्फ 2% बना देता है और लगभग 20% शरीर के ऑक्सीजन और रक्त का उपयोग करता है। कुल मस्तिष्क द्रव्यमान का 75% पानी है।
  12. यह शरीर में सबसे बड़ा अंग है, जिसमें 100 अरब न्यूरॉन्स या तंत्रिका कोशिकाएं (पृथ्वी पर कुल मानव आबादी 15 गुना) और एक ट्रिलियन ग्लियाल कोशिकाएं हैं और लगभग 150,000 मील की दूरी पर रक्त वाहिकाओं है।
  13. मस्तिष्क 0.5 एम / सेक के रूप में धीमी गति से सूचनाओं की गति को 120 मीटर / सेकेंड तक धीमा करता है। 4-6 मिनट के लिए मस्तिष्क ऑक्सीजन के बिना जीवित रह सकता है जिसके बाद यह मरना शुरू होता है। 5-10 मिनट के लिए ऑक्सीजन की कमी स्थायी मस्तिष्क क्षति हो सकती है।
  14. मस्तिष्क स्वास्थ्य और कार्य करने के लिए अच्छा पोषण अत्यंत महत्वपूर्ण है। वैज्ञानिकों के अनुसार, परहेज़ ही मस्तिष्क को खुद खाने के लिए मजबूर कर सकते हैं। कुपोषित भ्रूण और शिशुओं को संज्ञानात्मक और व्यवहारिक घाटे, धीमी गति से मोटर और भाषा के विकास और कम IQ से पीड़ित हैं। शिशुओं के दिमाग में कुल ग्लूकोज आपूर्ति का लगभग 50% उपयोग होता है, जो कि बच्चों को इतना सोता है कि एक कारण हो सकता है
  15. शारीरिक व्यायाम केवल मस्तिष्क के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह शेष शरीर के लिए है आंतरिक चिकित्सा के इतिहास में प्रकाशित हाल के एक अध्ययन में यह सुझाव दिया गया है कि व्यायाम उम्र में देरी कर सकता है जिसमें लोगों को 30% से अधिक अल्जाइमर रोग हो सकता है क्योंकि यह सुधार होता है और मस्तिष्क में रक्त के प्रवाह को और नियमित करता है।
  16. एक व्यक्ति के जीन का आधा मस्तिष्क के जटिल डिजाइन के लिए ज़िम्मेदार होते हैं, जो शरीर के शेष 98% के संगठन का वर्णन करते हैं।
  17. यह एक मिथक है कि हम मस्तिष्क के केवल 10% का उपयोग करते हैं, वास्तव में मस्तिष्क के हर हिस्से का एक ज्ञात कार्य है इसके अलावा, कोई भी बाएं / दाएं मस्तिष्क विभाजन नहीं है-वे मिलकर काम करते हैं। और नहीं, मस्तिष्क कोशिकाएं जब भी आप छींकते हैं तब तक मर नहीं जाती हैं।
मानव मस्तिष्क के काम के साथ ही बच्चों के लिए महत्वपूर्ण कार्यों को सिखाने के लिए, आपको मानव मस्तिष्क का एक मॉडल खरीदना होगा।

Friday, 25 August 2017

प्रकाश के बारे में (About Light in Hindi)

प्रकाश के बारे में पूरी जानकरी [हिंदी में]

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नमस्कार! दोस्तों, आज हम इस वेबसाइट पर प्रकाश के बारे में बात करेंगे। यह सारी बातें जनरल नॉलेज के लिए काफी अच्छा है। अगर आप किसी एग्जाम का प्रिपरेशन कर रहे हैं। तो यह सारी बातें जानना आपके लिए काफी फायदेमंद होगा। तो चलिए शुरू करते हैं।

प्रकाश के बारे में उपयोगी एवं रोचक बातें

  1. प्रकाश फोटान नमक छोटे-छोटे कणों से मिलकर बना है।
  2. प्रकाश तरंगे अनुप्रस्थ प्रकार की तरंगे है।
  3. प्रकाश का तरंग सिद्धांत हाईगेंस के द्वारा प्रतिस्थापित किया गया था।
  4. ध्रुवण अर्थात polarization की घटना के कारण प्रकाश तरंगों के अनुप्रस्थ होने की पुष्टि देता है।
  5. मैक्सवेल ने प्रकाश विद्युत चुंबकीय स्वरूप की खोज की थी। 
  6. ग्रेमॉलडी ने सर्वप्रथम यह दिखलाया की प्रकाश तरंगों में विर्वतन(diffraction) होता है।
  7. आइंस्टाइन ने प्रकाश विद्युत प्रभाव का प्रतिपादन किया तथा इसी खोज के कारण उन्हें नोबेल पुरस्कार प्राप्त हुआ था।
  8. ध्रुवण अर्थात Polarization की घटना प्रकाश एवं ध्वनि दोनों में घटित नहीं होती है। विर्वतन, परावर्तन एवं अपवर्तन दोनों में ही होता है।
  9. किसी अवरोध की कोर से प्रकाश का मुड़ना विर्वतन होता है अर्थात deffraction कहलाता है।
  10. व्यतिकरण interference का सिद्धांत प्रकाश की तरंग प्रकृति की पुष्टि करता है।
  11. प्रकाश विकिरण (light radiation) की प्रकृति तरंग एवं कण दोनों एक ही प्रकृति के होते है। 
  12. प्रकाश का चिकने पृष्ठ से टकराकर वापस लौटना प्रकाश का परावर्तन कहलाता है। 
  13. रोमर ने सर्वप्रथम प्रकाश का वेग ज्ञात किया था। 
  14. निर्वात में प्रकाश का वेग अधिकतम होता है।
  15. जल कांच और हीरे में प्रकाश की चाल का क्रम जल > काँच > हीरा होता है।
  16. चंद्रमा से पृथ्वी तक प्रकाश आने में 1 सेकंड का समय लगता है। 
  17. सूर्य से पृथ्वी तक प्रकाश आने में 8 मिनट का समय लगता है। 
  18. माध्यम में तापमान में वृद्धि के साथ प्रकाश की गति में कोई परिवर्तन नहीं होता है। 
  19. सर्वप्रथम न्यूटन ने बताया कि श्वेत प्रकाश सभी रंगों के प्रकाश से मिलकर बना है तथा प्रकाश अत्यंत सूक्ष्म कणों से मिलकर बने हैं तथा सीधी रेखा में गति करते हैं
दोस्तों, आपको यह प्रकाश के बारे में जानकारी कैसी लगी? कृपया नीचे कमेंट बॉक्स में जरूर बताइएगा। और किस टॉपिक पर आप इंफॉर्मेशन चाहते हैं। उस टॉपिक का नाम प्लीज कमेंट बॉक्स में बताइए। हम उस टॉपिक पर एक नया आर्टिकल इस वेबसाइट पर जरुर डालेंगे। धन्यवाद!

Friday, 18 August 2017

सौरमंडल के बारे में [About Solar System in Hindi]

सौरमंडल के बारे में [About Solar System in Hindi]

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सूर्य तथा उसके चारों ओर गुरुत्वाकर्षण के कारण भ्रमण करने वाले ग्रहों उपग्रहों आदि को सौरमंडल कहते हैं। अर्थात सूर्य का परिवार सौरमंडल कहलाता है।

सौरमंडल को अंग्रेजी में हम सोलर सिस्टम कहते हैं। सौरमंडल का मुखिया सूर्य है। सूर्य एक तारा है। सौरमंडल में ग्रहों की संख्या 9 थी लेकिन वर्तमान में ग्रहों की संख्या 8 है। नौवां ग्रह प्लूटो को 24 अगस्त सन 2006 को हमारे सौरमंडल के ग्रहों की श्रेणी से हटा दिया।

सूर्य सौरमंडल का मुखिया है। इसमें हाइड्रोजन 71 प्रतिशत तथा हीलियम 26.5 प्रतिशत व अन्य गैसों की प्रधानता है। इसका व्यास 13,92,200 किलोमीटर है। सूर्य के प्रकाश को पृथ्वी तक पहुंचने में 8 मिनट 20 सेकंड का समय लगता है। प्रकाश की चाल 3×10^8 km/s होता है।

सूर्य अपने अक्ष पर पूर्व से पश्चिम घूमता है। इसका मध्य 23 दिनों में तथा अध्रुवीय 35 दिनों में एक घुर्णन करता है। सूर्य के केंद्र पर नाभिकीय संलयन होता है। जो सूर्य की उर्जा का स्रोत है। पृथ्वी से इसकी दूरी 13 करोड किलोमीटर है। यह पृथ्वी का सबसे निकटतम तारा है। सूर्य की किरणों की गति 300000 किलोमीटर प्रति सेकंड है। सूर्य की अभी तक की आयु 5 अरब वर्ष है.

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क्या पृथ्वी को एलियंस से खतरा है?

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पृथ्वी को एलियंस से खतरा है

इस ब्रम्हांड में हम इंसान यह मानते हैं कि हमारे पृथ्वी के अलावा भी क्या कोई ऐसा ग्रह है। जहां पर हमारी तरह जीव जंतु रहते हैं। हो सकता है वह जीव टेक्नोलॉजी और विज्ञान के मामले में हमसे लाखों साल पीछे हो या फिर यह भी हो सकता है कि वह विकास के मामले में हम से कहीं ज्यादा उन्नत हो। क्या एलियंस सच में होते हैं?

पृथ्वी से एलियंस को सिग्नल भेजना

पृथ्वी से हर रोज न जाने कितने सिग्नल इस ब्रह्माण्ड में भेजे जाते हैं। जो यह पता करने के लिए होते हैं कि इस ब्रम्हांड में क्या कोई और भी ऐसा ग्रह है जहां जीव रहते है। ब्लैक नाइट सैटेलाइट (एलियंस का खुफिया उपग्रह)

लेकिन अगर सोचा जाए। तो हम इन 150 सालों में टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में इतने आगे बढ़ चुके हैं। जिसकी वजह से न जाने कितना प्रदूषण इस वातावरण में फैल चुका है। और हर रोज फैलता ही जा रहा है। तो सोचिए अगर कोई हमसे कही ज्यादा उन्नत सभ्यता इस ब्रम्हांड में मौजूद है। तो उनके ग्रह का क्या हालत हुआ होगा।
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एलियंस पृथ्वी के लिए खतरा साबित हो सकते हैं

अगर हम उनको सॅटॅलाइट के जरिये संदेश दे रहे हैं कि यहां इस पृथ्वी पर मानव जाति का वास है। तो यह हमारे लिए खतरनाक साबित हो सकता है। क्योंकि हमारे पास अभी भी प्राकृतिक कई संसाधन उपस्थित हैं। अगर किसी और उन्नत सभ्यता हमारे ग्रह के बारे में जान लिया। ऊपर से उनको सिग्नल भेजकर यह बताना है कि हम यहां पृथ्वी पर रहते हैं। तो यह हमारे लिए सबसे बड़ी बेवकूफी होगी।

क्योंकि अगर उस ग्रह की प्रजाति हमसे हजारों साल टेक्नोलॉजी और ज्ञान के क्षेत्र में आगे हैं। तो उनके लिए हम मातृ कीड़े मकोड़े के समान होंगे। क्योंकि वह पल भर में हमारे पृथ्वी पर कब्जा करने की छमता रख सकते हैं। और हमारे संसाधन का उपयोग अपने ग्रह के लिए कर सकते हैं।

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अगर उनको यह पता चल जाता है कि हमारे पृथ्वी पर भारी मात्रा में प्राकृतिक संसाधन है। तो उन संसाधनों का उपयोग वह अपने ग्रह के लिए तथा अपने लोगों के भलाई के लिए कर सकते हैं। जिसका बहुत भारी नुकसान हम पृथ्वी वासियों को भुगतना हो सकता है।

आपका एलियंस के बारे में क्या मानना है?

इसीलिए मेरा मानना है कि हमें इस तरह के सिग्नल को कभी इस ब्रह्माण्ड में नहीं भेजना चाहिए। जिससे किसी और ग्रह की उन्नत सभ्यताएँ यह जान जाएं कि हम यहां इस पृथ्वी पर रहते हैं। भगवान ने हमें जितना दिया है। उतने में ही हमें खुश रहना चाहिए। तथा इस पूरे मानव जाति की सुरक्षा एवं पृथ्वी की सुरक्षा के बारे में हमें सोचना चाहिए। क्योंकि किसी ने यह सत्य कहा है कि मानव जाति का विकास ही विनाश का कारण बनेगा।

Sunday, 13 August 2017

भारत में हुए परमाणु परीक्षण के बारे में

परमाणु परीक्षण के बारे में पूरी जानकारी

Dr. A.P.J. Abdul Kalam, Atal Bihari Vajpayee and Team
नमस्कार! दोस्तो,आज हम भारत में हुए परमाणु परीक्षण के बारे में बात करेंगे। भारत में पहली बार परमाणु परीक्षण 18 मई 1974 में पोखरण (जैसलमेर-राजस्थान) में किया गया था। यह परमाणु बम भारत में ही बना था। इस परमाणु बम की कुल क्षमता 12 किलोटन थी।

भारत में दूसरा परमाणु परीक्षण

फिर भारत ने दूसरी बार परमाणु परीक्षण 11 मई व 13 मई 1998 में जैसलमेर जिले के खेतोलोई  गांव के करीब किया था। जिसे शक्ति-98 नाम दिया गया। इस परमाणु बम का सफल परीक्षण सुपर कंप्यूटर की मदद से किया गया। इसकी वजह से भारत सुपर कंप्यूटर द्वारा परमाणु परीक्षण करने में सफल रहा तथा सुपर कंप्यूटर की मदद से इसके संचालन करने की क्षमता हासिल कर लिया।

तत्व जो परमाणु परीक्षण में उपयोग किये गए

शायद आप नहीं जानते, 1974 के पोखरण परमाणु विस्फोट में प्लूटोनिक का उपयोग किया गया था। जबकि वर्ष 1998 में हुए विस्फोट में परिवर्धित यूरेनियम से लेकर ट्रिटियम ड्यूटीरियम तक का उपयोग किया गया था।

आशा करता हूं। यह जानकारी आपको अच्छी लगेगी। अगर आपको और भी परमाणु परीक्षण से जुड़ी जानकारी चाहिए। तो कृपया नीचे कमेंट बॉक्स में लिखिए। मैं ऐसे ही जानकारी इस वेबसाइट पर लेकर आता रहूंगा। और आपको उपयोगी जानकारियां देता रहूंगा। अब तक के लिए धन्यवाद!

Friday, 11 August 2017

About GPS (Global Positioning System) in Hindi

About GPS: Know in Hindi

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देखा जाए तो आज के समय में GPS का इस्तेमाल काफी आम बात हो गया है। एक समय था, जब GPS का इस्तेमाल सिर्फ सेना को सही लोकेशन की जानकारी देने के लिए इस्तेमाल किया जाता था। लेकिन आज के समय में GPS हर मोबाइल फोन में, लैपटॉप में और भी अन्य गैजेट्स में देखने को मिल जाते हैं।

जैसा की हम जानते हैं GPS सैटेलाइट के आधार पर काम करता है। GPS का पूरा नाम ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम है। यह एक सबसे विस्तृत नेविगेशन सिस्टम है। जो समय के साथ-साथ किसी भी व्यक्ति, वाहन या सामान का सही लोकेशन बताता है।

यहाँ पढ़े: इंटरनेट कैसे काम करता है?

शायद आप नहीं जानते GPS को सबसे पहले यूनाइटेड स्टेट ऑफ अमेरिका के सेना विभाग ने बनाया था। फिर बाद में इस का इस्तेमाल आम लोगों के लिए उपलब्ध करा दिया गया। जीपीएस के जरिए आज के समय में आप आसानी से पूरे दिन का मौसम के बारे में जान सकते हैं।

GPS डिवाइस रिसीवर के साथ काम करता है। मतलब जो भी डाटा हमें सेटेलाइट से मिलता है। वह जीपीएस रिसीवर डिवाइस और सेटेलाइट मिल उसकी गणना करते है।

जरूर पढ़े: हमारे जीवन पर सोशल साइट्स का साइड इफेक्ट्स।

GPS काम कैसे करता है?

आपका जीपीएस डिवाइस 3 से 4 सैटेलाइट से लोकेशन की जानकारी लेता है। जिसकी accuracy 10 से 100 मीटर के रेंज में हो सकती है। आज के समय में एंड्राइड डेवलपर GPS का इस्तेमाल कई Android एप्लीकेशन में करते हैं। जैसा कि हमने देखा है अक्सर हम अपने मोबाइल फोन में कोई सॉफ्टवेयर ओपन करते हैं। तो वह एंड्राइड एप्लीकेशन लोकेशन ऑन करने के लिए कहता है। इसका मतलब यह है कि वह एप्लीकेशन चाहता है कि आप अपना करंट लोकेशन उसके साथ शेयर करें।

यहाँ पढ़े: About 1G, 2G, 3G, 4G and 5G Technology in Hindi

जीपीएस लोकेशन कैसे पता करता है?

किसी भी जगह का लोकेशन पता करने के लिए कम से कम तीन सैटेलाइट की आवश्यकता होती है। जो 2D दो डायमेंशनल पोजीशन पता करती है। लेकिन अगर वही आप 3D में जाना चाहते हैं यानि की लंबाई चौड़ाई के साथ-साथ ऊंचाई और गहराई भी देखना चाहते हैं। तो उसके लिए कम से कम चार सैटेलाइट की आवश्यकता होती है। एक बार यह सारी जानकारियां सैटेलाइट को पता हो जाती है। तो सैटेलाइट आपके जीपीएस रिसीवर से कँनेट हो जाता है। और अंय कई चीजों की गणना करना वह शुरू कर देता है। जैसे आपकी गति, दूरी, आप एक जगह से दूसरी जगह जाने में आपको कितना समय लगेगा, व सारी घटना जो आपके लिए काफी जरूरी होती है।

अवश्य पढ़े: भविष्य में होने वाले बदलाव (Facts About Future)

आशा करता हूं यह जानकारी आपको अच्छी लगी होगी। अगर आपको GPS के बारे में जानकारी अच्छी लगे। तो कृपया इसको शेयर करिए। अगर आपके मन में किसी भी प्रकार का प्रश्न है। तो नीचे कमेंट बॉक्स में अपने question को लिखिए। धन्यवाद!

Thursday, 10 August 2017

हम सपना क्यों देखते हैं? [Dream Facts]

सोने के बाद हम सपना क्यों देखते हैं? (Dream facts in Hindi)

सोने के बाद हम सपना क्यों देखते हैं? Sleep and dream facts in Hindi. Hum sapna kyo dekhtey hain?
दोस्तों! आज मैं इस वेबसाइट पर सोने के बाद हम सपना देखने [Dream Facts] से जुड़े कुछ ऐसी बातें बताने जा रहा हूं। जिस पर हम ध्यान नहीं देते हैं। जैसा कि हम जानते हैं कि अक्सर हम सोते समय सपने में कुछ दृश्य देखा करते हैं। उन सपनों में हम विभिन्न प्रकार के जगहों पर या फिर ऐसे दृश्य देखते हैं। जिसे हमने कभी देखा भी ना हो। लेकिन जैसा आप सोचते हैं वैसा बिलकुल भी नहीं है।

जो भी हम सपने में देखते हैं। उस चीजों को हम पहले भी अपने जीवन में देख चुके होते हैं। चाहे वह कोई जगह हो या टेलीविजन पर आ रहा कोई वीडियो हो या फिर कोई एक फोटो हो सकता है।

सपने में दृश्य [Dream Facts]

आप अक्सर ध्यान नहीं देते, लेकिन हर दृश्य किसी ना किसी चीज से मेल जरूर खाती है. हो सकता है आप 6 साल पहले देखे हुए किसी दृश्य को आज अपने सपने में देखे हो। लेकिन आपको वह दृश्य इतना नया लगा जैसे कि आप उस जगह कभी गए ही ना हो। लेकिन असल में आप उस जगह को देख चुके होते हैं।

दिमाग में दृश्य का पहले  मौजूद होना [Dream Facts]

जो भी हम काम करते हैं या फिर जहां भी हम जाते हैं। वहाँ जो भी दृश्य हम देखते हैं। वो अपने रियल लाइफ में विस्तारीत चित्र और वीडियो के रूप में हमारे दिमाग में Store होता जाता है। जब हम उस दृश्य को याद करना चाहते हैं। तो वह चीज याद नहीं आता। लेकिन जब हम सो रहे होते हैं। तो उस समय हमारे दिमाग में स्टोर  तमाम दृश्यों में से कुछ दृश्य मिलकर आपस में एक ऐसा दृश्य बनाते हैं। 

जो दृश्य आपको सपने में हैरान कर देता है। जब आप सो कर उठते हैं। आप यह सोचने लगते हैं कि आपने उस जगह को देखा ही नहीं है या फिर आप उस जगह पर कभी गए ही नहीं फिर भी वह दृश्य आपके दिमाग में आया कैसे?

पिछला जन्म के दृश्य [Dream Facts]

कुछ लोग तो यह भी सोचने लगते हैं कि पिछले जन्म की चीजें सपने में दिखाई देती है। लेकिन ऐसा नहीं है यह एक सिर्फ वहम है। असलियत यह है कि हमारे दिमाग में न जाने कितने चित्र हमारे दिमाग में स्टोर है। यह दृश्य उन्ही दृश्यों का रचना है।

सपना देखना अद्भुत है

आपको जानकर हैरानी होगी कि मात्र एक फोटो देखने से अगर वह दृश्य आप सपने में देखते हैं। तो वह एक ऐसा एहसास होगा जैसे आप उस जगह पर रह रहे हैं। वहां के लोगों से आप बात कर रहे हैं। वहां की चीजों को आप महसूस कर रहे हैं। वाकई में यह काफी आश्चर्यजनक बात है। इसीलिए मनुष्य का दिमाग कल्पनाओं में सर्वश्रेठ है।

दोस्तों अब तक के लिए इतना ही। अगर आपको यह जानकारी अच्छी लगे। तो कृपया कमेंट बॉक्स में हमें बताइए। आशा करता हूं। आप के लिए इसी तरह के रोचक जानकारियां मैं इस वेबसाइट पर लेकर आता रहूं। धंयवाद

Wednesday, 2 August 2017

समय यात्रा (Time travel) in Hindi

समय यात्रा (Time travel) के बारे में

Time travel in Hindi. Samay yatra in Hindi. Kya samay yatra sambhav hai.

नमस्कार! दोस्तों, मेरा नाम HindiStudy.in है। आज मैं यहाँ टाइम मशीन के बारे में बात करने जा रहा हूं। जैसा कि हम सभी लोग जानते हैं कि जब भी हम टाइम मशीन के बारे में सुनते हैं। तो हमारे दिमाग में ख्याल आता है कि काश हम अपने अतीत में जाकर उन गलतियों को सुधार सकते जो हमसे हुई है।

दोस्तों अगर देखा जाए तो हर इंसान इस बारे में जरूर सोचा होगा। क्योंकि हर किसी न किसी व्यक्ति से जरुर कुछ ना कुछ ऐसी गलतियां हुई है। जो वो अतीत में जाकर सुधारना चाहता है। 

अगर हमें टाइम मशीन के जरिए भविष्य में जाने को मिले। तो हम क्या करना चाहेंगे? ऐसी कौन सी चीज है जो हम भविष्य में अपने बारे में जानना चाहेंगे?

दोस्तों, मैं यहां पर एक अपना अनुमान आप सभी लोग से शेयर करने जा रहा हूं। इसका मेरे पास कोई प्रूफ नहीं है। यह सिर्फ मेरी एक सोच है।

भूतकाल में समय यात्रा

मान लो कोई एक व्यक्ति अपने भूतकाल में जाकर अपनी गलतियों को सुधार कर वापस अपने वर्तमान समय में आता है। फिर भी वर्तमान समय में किसी भी प्रकार का परिवर्तन नहीं पायेगा । ऐसा क्यों होगा? चलिए जान लेते हैं।

दोस्तों, ऐसा इसलिए होगा क्योंकि जिस व्यक्ति ने अपने भूतकाल में जाकर अपनी गलतियों को सुधारा है। उसी क्षण वहां से एक नया टाइमलाइन यानी एक नयी समय रेखा की रचना हो जाती है। अर्थार्थ आप कह सकते हैं कि उस भूत काल में सुधारे गए गलतियों की वजह से आपका उस समय का अस्तित्व की अपनी एक नई दुनिया बन जाती है। 

लेकिन आपकी जो वर्तमान स्थिति है उसमें किसी भी प्रकार का बदलाव नहीं होगा। हालांकि उस गलती के सुधारने के बाद एक आप का जो नया भविष्य बनेगा वो किसी और समय रेखा में होगा। इसलिए आप यह कर सकते हैं कि भूतकाल में जाना व्यर्थ है। क्योकि आप अपना पीछे की चीज़े नहीं बदल सकते।

भविष्यकाल में समय यात्रा

अब आते हैं, भविष्यकाल के बारे में, अगर हमें टाइम मशीन के जरिए भविष्य में जाने को मिले। तो इसके बहुत सारे फ़ायदे हमें मिल सकते हैं। जैसे भविष्य में पहुंचने पर अगर हम अपने आपको देखते हैं और अपने आप से बात करते हैं। तो पता चलता है कि हमने कई ऐसी गलतियां कर दी है। जो कि भविष्य के व्यक्ति के अनुसारभूतकाल है। 

लेकिन आपके अनुसार वह वर्तमान होगा। यानी कि आप अपने वर्तमान में जाकर जिन कामों को करने वाले हैं। अर्थात जिन कामों को करने से आपको भविष्य में हानि हो सकती है। वह काम आप करना बंद कर देंगे या उसमे सुधर कर सकते हैं। तथा दूसरी तरफ यानी जो सही निर्णय हो सकता है उन्हें निर्णय की तरफ आप अपना ध्यान लगा सकते हैं। इसलिए हम यह कह सकते हैं कि भविष्य में जाना भूतकाल में जाना के अपेक्षा ज्यादा सही रहेगा।

क्या समय यात्रा संभव है?

मैं यह तो नहीं कहता कि हो सकता है। भविष्य में टाइम मशीन के जरिए हमें समय यात्रा करने को मिले लेकिन अगर ऐसी मशीन बनती है। तो जरूर इसे काफी खुफिया तरीके से तथा हाई सिक्योरिटी में रखा जाएगा। ताकि इसका इस्तेमाल अच्छे कामों के लिए किया जा सके. क्योंकि बढ़ते टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में हम देख सकते हैं कि टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल गलत कामों में तथा अच्छे कामों में दोनों में ही होता है। इसलिए अगर समय यात्रा करने वाली मशीन का अविष्कार होता है। तो भविष्य में उसकी देखभाल करना सबसे पहला कदम होना चाहिए।

दोस्तों आप टाइम मशीन के बारे में क्या सोचते हैं। अगर आपको समय यात्रा करने को मिले तो आप क्या करना चाहेंगे। कृपया कमेंट बॉक्स में बताइए। धन्यवाद!

Wednesday, 31 May 2017

भविष्य की शिक्षा व्यवस्था कैसी होगी? (Future Education System)

Future Education System in Hindi

Future Education System in Hindi. भविष्य की शिक्षा व्यवस्था कैसी होगी? (Future Education System)

भविष्य की शिक्षा व्यवस्था कैसी होगी?

  • अगर देखा जाए तो आज पूरी दुनिया डिजिटल होती जा रही है। अथार्त हम लोग इंटरनेट और कंप्यूटर जैसी तकनीक का इस्तेमाल ज्यादा कर रहे हैं। 
  • हर देश और देशों के सभी प्रदेश और शहर एक दूसरे से इंटरनेट के जरिए जुड़ते चले जाते हैं। इंटरनेट एक ऐसा माध्यम पता चला जा रहा है। जो आपको किसी भी प्रश्न का उत्तर कुछ सेकंड में आपको आपके सामने भी बता देता है।
  • देखा जाए तो दिन प्रतिदिन प्रदूषण बहुत तेजी से फैलता चला जा रहा है। आने वाले समय में प्रदूषण इतना ज्यादा हो जाएगा कि सभी देशों की सरकारों को पूरी तरह से पेड़ पौधों की कटाई पर रोक लगानी होंगी।
  • इसके बाद हम सभी लोगों का हर काम इंटरनेट कंप्यूटर पर होगा। 
  • यह व्यवस्था पूरी तरह से पूरे दुनिया पर लागू कर दी जाएगी। इसके बाद सारी शिक्षा व्यवस्था और कामकाज कंप्यूटर पर होंगे और सारे कंप्यूटर को एक दूसरे से जोड़ने के लिए इंटरनेट का का माध्यम अपनाया जाएगा। क्योंकि वर्तमान में कई देशों में इस चीज को अमल में लाया गया है।
  • और वह दिन दूर नहीं जब यह नियम पूरे दुनिया भर में लागू हो जाएगी। हम इंसान पर जब तक कोई मुसीबत नहीं आती। जब तक किसी प्रकार का हमें कष्ट नहीं होता है। 
  • तब तक हमें उस चीज का महत्व समझ में नहीं आता। अगर हम यह नियम अभी से पूरे दुनिया में लागू कर दे।  
  • तो सोचिए प्रदूषण पर कितना नियंत्रण अभी से हो जाएगा। यह एक अच्छी सोच है। और मैं चाहूंगा कि इस अच्छी सोच को आप अवश्य शेयर करें। और सभी लोगों तक जरूर पहुंचाएं। धन्यवाद

Monday, 29 May 2017

ब्लैक हैट हैकर (Black Hat Hacker) क्या है?

Black Hat Hacker in Hindi. ब्लैक हैट हैकर (Black Hat Hacker) क्या है? ब्लैक हैट हैकर के बारे में पूरी जानकारी.  ब्लैक हैट हैकर सिस्टम को कैसे हैक करते हैं?

ब्लैक हैट हैकर के बारे में पूरी जानकारी

आपने इंटरनेट तो काफी इस्तेमाल किया होगा और हैकर का नाम तो आपने जरूर सुना ही होगा। आज हम ऐसे हैंकर के बारे में बात करने जा रहे हैं। जिनकी पहचान इंटरनेट की दुनिया में कुछ अलग ही है। आज हम यहां बात करेंगे ब्लैक हैट हैकर के बारे में।

 ब्लैक हैट हैकर सिस्टम को कैसे हैक करते हैं?

ब्लैक हैट हैकर बिना किसी के अनुमति के किसी के भी सिस्टम पर अटैक करते हैं। और सिस्टम को नुकसान पहुंचाते हैं। ऐसे हैंकर सिस्टम की सिक्योरिटी तोड़ने में माहिर होते हैं। इन्हें पहले से ही पता होता है कि सिस्टम में कैसे घुसना है और क्या करना है। ब्लैक हैट हैकर्स को ऑपरेटिंग सिस्टम और इंटरनेट कनेक्शन का अच्छा नॉलेज होने की वजह से वह सिस्टम में घुसने के लिए सिस्टम में किसी न किसी प्रकार की कमी को ढूंढ ही निकालते हैं। फिर चाहे सिस्टम कितना भी स्ट्रांग क्यों ना हो। उस कमी को ढूंढ निकालने के बाद वह सिस्टम को हैक करके सिस्टम के सारा डाटा पर अपना कब्जा जमा लेते हैं।

आजकल आप अक्सर इंटरनेट पर ऐसे समाचार जरूर सुनते होंगे कि किसी हैकर ने किसी प्रचलित व्यक्ति का अकाउंट हैक कर लिया। ये हैकर वही होते है जो अपनी पहचान छुपा कर सिस्टम या किसी फेमस व्यक्ति के अकाउंट पर अटैक करते है।

Sunday, 21 May 2017

पृथ्वी के बारे में ज्यादातर पूछे गये सवाल-जवाब

पृथ्वी(Earth) से जुड़े कुछ प्रश्‍न और उत्‍तर (Some questions and answers related to Earth)

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क्या आप पृथ्वी(Earth) के बारे में ये बातें जानते है? (Do you know these things about Earth?)

1. पृथ्वी की कुल आयु कितनी है?
उत्तर: लगभग 4.54 बिलियन साल

2 . सूर्य के चारों ओर परिक्रमण के दौरान, पृथ्वी अपनी कक्षा में कितनी बार घूमती है?
उत्तर: 365 बार

3. पृथ्वी पर समुंद्र में ज्वार-भाटे क्यों आते है?
उत्तर: पृथ्वी और चंद्रमा के बीच गुरुत्वाकर्षण की वजह से

4. पृथ्वी की आतंरिक रचना के तीन प्रमुख परतों के नाम क्या है?
उत्तर: भूपटल, भूप्रावार और क्रोड

5. पृथ्वी का एकमात्र प्राकृतिक उपग्रह कौन है?
उत्तर:  चंद्रमा

6. पृथ्वी की आकृति कैसी है?
उत्तर: अंडाकार

7. पृथ्वी को नीला ग्रह  क्यों कहा जाता है?
उत्तर: पानी की उपस्थिति के कारण

8. सूर्य के बाद पृथ्वी का सबसे निकट का तारा का नाम क्या है?
उत्तर: प्रॉक्सिमा सेंचुरी

9. हमारे सौर मंडल के बड़े ग्रहों में पृथ्वी का स्थान किस नंबर पर है?
उत्तर: पांचवां

10. पृथ्वी से चंद्रमा का कितना प्रतिशत भाग दिखाई देता है?
उत्तर: 57 प्रतिशत

11. कर्क रेखा किन देशो से होकर गुजरती है?
उत्तर: भारत, चीन और म्यांमार

12. साल के किस महीने में पृथ्वी सूर्य से कुछ दूर चली जाती है?
उत्तर: जुलाई में

आपको इसे भी जरूर पढ़ना चाहिए।

Saturday, 13 May 2017

क्या एलियंस सच में होते है? (Aliens in Hindi)

एलियंस: दूसरे ग्रह के प्राणी . क्या एलियंस का अस्तित्व सच है या झूठ. गवर्नमेंट UFO और एलियंस के बारे में क्या कहती है? एलियंस का  पृथ्वी से क्या संबंध है? एलियंस और अमेरिका का खुफिया संगठन .

एलियंस: दूसरे ग्रह के प्राणी (All about Aliens in Hindi)

दोस्तों, अक्सर जब भी हम एलियंस का नाम सुनते हैं। हमारे दिमाग में एक ऐसे प्राणी का चित्र बनकर आता है। जिसका जन्म पृथ्वी जैसे किसी और ग्रह पर हुआ हो। और इससे जुड़े न जाने कितने सवाल हमारे दिमाग में आ जाते हैं। जिनके बारे में हम अक्सर सोचा करते हैं।

क्या एलियंस का अस्तित्व सच है या झूठ

दुनिया में अक्सर एलियंस देखे जाने की बात आती है। और कई बार कई तरह के उड़नतश्तरियों के उड़ने की खबर आती रहती है। लेकिन इसमें कितनी सच्चाई है, और कितना झूठ इसका पुख्ता सबूत के बारे में अभी तक हमारी सरकार ने हमें नहीं बताया। इसके पीछे का क्या रहस्य है? अभी तक वह उभर कर सामने नहीं आया है। ऐसे कई सवाल है जो अक्सर हमें परेशान करती रहती है।

गवर्नमेंट UFO और एलियंस के बारे में क्या कहती है?

आखिर सरकार हमसे ऐसी कौनसी बात छुपाना चाहती है? इसके पीछे क्या वजह हो सकती है? एलियंस और यूएफओ की मानें तो यह सबसे ज्यादा अमेरिका, रशिया, ब्राजील और कुछ चुनिंदा देशों में देखे जाते हैं। कई विशेषज्ञों का कहना है कि हमारी पृथ्वी पर एलियंस का आना-जाना रहता है।  

एलियंस का पृथ्वी से क्या संबंध है?

आखिर एलियंस हमारे ग्रह पर क्यों आते हैं।  कई विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि यह एलियंस की पूर्वजों ने ही हमें बनाया है। यह टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में हम से कहीं ज्यादा विकसित हैं। इनके पास ऐसे अत्याधुनिक अंतरिक्ष यान है। जिनके माध्यम से वह सूर्य के पास भी जा सकते हैं तथा प्रकाश के वेग से एक सौर मंडल से दूसरे सौर मंडल का सफ़र बहुत ही आसानी से तय कर सकते हैं।

एलियंस और अमेरिका का खुफिया संगठन

कई लोगों का यह भी मानना है कि अमेरिका का खुफिया संगठन तथा एलियन एक साथ मिलकर कुछ ऐसे प्रोजेक्ट पर काम कर रहे हैं। जिन्हें सार्वजनिक नहीं बताया जा सकता। और यह भी माना जाता है कि एलियंस अपने टेक्नोलॉजी उस खुफिया संगठन को किसी और चीज के बदले देती है। जो उन्हें हमसे चाहिए इसी कारण शायद हम टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में इतने कम समय में काफी आगे आ चुके हैं। क्या NASA इस संगठन में सामिल है? अगर देखा जाए तो टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में हम पिछले 70 सालों में इतने आगे बढ़ चुके हैं। जितना पीछे के एक हजार सालों में नहीं कर पाए है। अगर हम इसी तरह से आगे बढते रहे तो भविष्य दूर नही जब हम किसी और ग्रह पे हम मनुष्यों का बसेरा होगा।

आप एलियंस और UFO के बारे में क्या कहते है?

अगर आप ज्यादातर इंटरनेट कर इस्तेमाल करते हैं। तो आपने YouTube और न जाने कितने वेबसाइट पर यूएफओ और एलियंस के बारे में पढ़ा होगा। लेकिन हमेशा आपके मन में यह बात रह जाती है कि यह बात सच है या झूठ। लेकिन देखा जाए ऐसा कुछ ना तो कुछ जरूर मौजूद है। जो हमसे छुपाया गया रहा है। बिना किसी वजह की कोई बात नहीं फैलती और एलियंस और UFO की बात तो पूरी दुनिया में फैल चुकी है। आप इस बारे में क्या सोचते हैं? क्या यह बात सच है? या झूठ। क्या एलियंस होते हैं? या फिर सरकार द्वारा फैलाए गए एक बहुत बड़ा झूठ है? 

अवश्य पढ़े:-
  1. वर्महोल के जरिये एक सौर मण्डल से दुसरे सौर मण्डल का सफ़र सेकंडो में होगा।
  2. किसी सौर मण्डल का विनाश ब्लैक होल से कैसे होता है?
  3. एलियंस कर तीन हज़ार साल पुराना उपग्रह पाया गया। जो पृथ्वी का चक्कर लगा रहा है।
  4. भारत में UFO देखे जाने की घटना (UFO sighting in India)
  5. हमारा भविष्य टेक्नोलॉजी के फील्ड में कैसा होगा?
  6. NASA स्पेस सेण्टर के बारे में रोचक जानकारी।

Wednesday, 10 May 2017

वर्महोल (Wormhole) क्या है?

About Wormhole in Hindi. Wormhole kya hai? Wormhole kaise kaam karta hai? Wormhole mein travel kaise kiya jaata hai. वर्महोल रिसर्च (Wormhole research).

वर्महोल क्या होता है? - About Wormhole in Hindi

आपका इस वेबसाइट पर स्वागत है। आज आप यहां वार्म होल के बारे में जानेंगे कि वर्महोल के बारे में हमारे वैज्ञानिक और विशेषज्ञों का क्या कहना है? वर्महोल का क्या सिद्धांत है और ये काम कैसे करता है? वर्महोल (Wormhole) क्या है? यह जानने से पहले आपको ब्लैक होल के बारे में अवश्य पढ़ना चाहिए।

वर्महोल (Wormhole) कई ब्रह्मांड के एक छोर को दुसरे छोर को एक दूसरे से इस प्रकार जोड़ता है कि लाखों प्रकाश वर्ष की दूरी को आप चाहे तो कुछ घंटों में ही तय कर सकते हैं। अगर मैं उदाहरण देकर समझाऊं तो मैं यह कह सकता हूं कि अगर आपको किसी एक स्थान से दूसरे स्थान तक जाना हो तथा दूसरा स्थान इतना दूर है कि आपको वहां तक पहुंचने में 50 साल लग सकता है। तो वर्महोल (Wormhole) के सिद्धांत के अनुसार आप इस दूरी का सफर आप मात्र 2 से 3 सेकंड में वार्म होल के जरिए पूरा कर सकते हैं।

वर्महोल रिसर्च (Wormhole research)

दुनिया भर के वैज्ञानिक वार्म होल के बारे में अन्तरिक्ष में काफी जांच पड़ताल कर रहे हैं। माना जा रहा है कि वर्महोल इतने छोटे होते हैं की इसके अन्दर  एक कड़ भी नहीं जा सकता। इसलिए वैज्ञानिक इस पर शोध कर रहे हैं कि वर्महोल (Wormhole) को ढूँढ कर उसको कुछ इस प्रकार से इतना बड़ा बनाया जाए। जिसके माध्यम से हम अंतरिक्ष में कुछ नई चीजों का अध्ययन कर सके तथा ब्रह्मांड में छुपे उन रहस्यों को जान सके तो आज तक हम नहीं जान पाए हैं।

कई वैज्ञानिकों का यह मानना है कि वार्म होल बनाना नामुमकिन है क्योंकि वर्गमूल बनाने के लिए हमें इतनी ज्यादा मात्रा में उर्जा चाहिए कि हम उतनी उर्जा को उत्पन्न नहीं कर सकते। वर्तमान समय में अगर पूरी दुनिया का उर्जा एक साथ लगा भी दिया जाए तो भी हम वॉर्म होल नहीं बना सकते। 

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वैज्ञानिकों का मानना है कि वर्महोल (Wormhole) बनाने के लिए हमें एक पूरे सूर्य जितनी ऊर्जा चाहिए। इसलिए इतनी उर्जा का उत्पन्न करना वर्तमान में तो संभव नहीं है। लेकिन हो सकता है भविष्य में हम तकनीक के क्षेत्र में इतने आगे बढ़ जाए कि हम उतनी ऊर्जा का उत्पादन कर सके। क्योंकि इस दुनिया में कोई भी चीज असंभव नहीं है।

तकनीक के क्षेत्र में बड़ा कदम

आज के समय में हम जो भी टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कर रहे हैं। अगर सौ साल पहले उसकी कल्पना अगर कोई करता। तो लोग आपको पागल कहते और आप को डांट कर भगा देते। अगर आप फ़ोन के बारे में बात करते तो लोग आपको ये कहते कि तुम क्या बकवास कर रहे हो हजारों किलोमीटर दूर व्यक्ति एक दूसरे से कैसे बात कर सकता है? लेकिन आज के समय में देखा जाए तो यह एक आम बात है। 

उसी प्रकार धीरे-धीरे हम न जाने टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में इतनी आगे बढ़ चुके हैं कि आज हमारे पास हवाई जहाज है, मोबाइल फोन है, टेलीविजन है, मोटर गाड़ी इत्यादि है। इसलिए यह कहना गलत होगा कि आज जो हमारी कल्पना है वो गलत है।  हम आगे चलकर टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में वह काम कर सकते हैं जो आज के समय में भले ही असंभव है।

वर्महोल (Wormhole) की जानकारी कैसी लगी?

आपको यह जानकारी कैसी लगी कृपया नीचे कमेंट बॉक्स में जरूर बताइए। अगर आपको यह जानकारी अच्छी लगे तो अपने दोस्तों और अपने परिवार के लोगों के साथ जरूर शेयर करिए। आशा करता हूं कि मैं आगे भी इसी तरह के जानकारी आपके साथ शेयर करूंगा।

Sunday, 7 May 2017

ब्लैक होल क्या है? (About Black Hole in Hindi)

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आज आप यहां पर ब्लैक होल के बारे में जानेंगे। आखिर ब्लैक होल क्या है और उसके क्या सिद्धांत है। हालांकि देखा जाए तो ब्लैक होल का विषय इतना तेजी से फैलता जा रहा है कि लोग इसके बारे में काफी रुचि ले रहे हैं। आज यहां पर हम जानेंगे कि ब्लैक होल कैसे बनता है और इसके बारे में कई विशेषज्ञों का क्या कहना है। तो चलिए शुरू करते हैं।

क्या ब्लैक होल एक काल्पनिक सोच है?

सबसे पहले बात आती है कि ब्लैक होल क्या असलियत में किसी ने देखा है, या फिर यह एक काल्पनिक सोच है। अगर बात करें ब्लैक होल की तो विभिन्न विशेषज्ञों और साइंटिस्टों द्वारा शोध किया गया एक काल्पनिक सिधांत है। जो मात्र एक कल्पना के अलावा और कुछ नहीं  है। अर्थात अभी तक यह सिद्ध नहीं हो पाया है कि यह वाकई में अंतरिक्ष में ब्लैक होल की घटना घटित होती है भी या नहीं। ब्लैक होल के विषय में विभिन्न वैज्ञानिकों का अपना सिद्धांत है। लेकिन कुछ ऐसे सिद्धांत है जो सभी विशेषज्ञों के सिद्धांतों से मेल खाते हैं।

ब्लैक होल का गुरुत्वाकर्षण बल क्यों ज्यादा होता है?

विशेषज्ञों का कहना है जब भी कोई तारा नष्ट होता है। तो वह ब्लैक होल की रचना करता है। जिसका गुरुत्वाकर्षण बल इतना अधिक होता है कि आसपास के सभी नजदीकी ग्रहों को अपनी तरफ खींच कर अपने आप में समाहित कर लेता है। इसका कारण उसका घनत्व है।


ब्लैक होल में जाने वाली प्रकाश वापस क्यों नही आती?

कई विशेषज्ञों यह भी कहना है कि ब्लैक होल में गई रोशनी वापस नहीं आती। क्योंकि हम यह बात जानते हैं कि जो रोशनी किसी वस्तु से टकराकर हमारे आँख पर वापस आती है तभी वह वस्तु हमें दिखाई देती है। लेकिन ब्लैक होल का सिद्धांत बहुत ही अजीब है। ब्लैक होल में जाने वाली कितनी भी शक्तिशाली प्रकाश वापस लौट कर नहीं आती।

ब्लैक होल में जाने पर क्या होगा?

कई वैज्ञानिकों का यह कहना है कि ब्लैक होल में अगर आप गिर जाते हैं। तो आपके लिए समय रुक जाता है अर्थात अगर आपकी उम्र मात्र 25 साल हो और आप ब्लैक होल में गिर जाते हैं। तो 50 साल बाद जब आप  ब्लैक होल से बाहर आएंगे तब भी आपकी उम्र 25 साल जितनी होगी। बल्कि औरों के लिए आप की उम्र 75 साल होगी। और बाकी लोगों कि उम्र पचास वर्ष ज्यादा होगी आपके उम्र के तुलना में।

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ब्लैक होल की रचना कैसे होती है?

अगर हम उदाहरण के तौर पर बात करें तो जो हमारा सूर्य है और उसके चारों ओर कई ग्रह परिक्रमा कर रहे हैं। जैसे पृथ्वी, मंगल, बुध ग्रह आदि। अगर किसी कारणवश अगर हमारा सूर्य नष्ट होता है। एक ऐसा ब्लैक होल कि उत्पत्ति होगी। जो हमारे सौर मंडल के सभी करीबी ग्रहों को अपने अंदर खींच लेगा और अपने आप में समाहित कर लेगा। फिर कई अरबो खरबो साल बाद फिर से एक नई प्रक्रिया शुरु होगी और वह प्रक्रिया के कारण। फिर से नया सूर्य तथा नए ग्रहों का रचना होगा और ये प्रक्रिया चलती रहेगी।

ब्लैक होल से जुड़ी यह जानकारी आपको कैसी लगी?

कृपया नीचे कमेंट बॉक्स में बताइए। अगर आपको यह जानकारी अच्छी लगी। तो कृपया इसको शेयर करिए और अपने दोस्तों को तथा अपने परिवार के लोगों को उसके बारे में जरूर बताइए। मेरी यही कोशिश रहेगी कि आगे भी इसी तरह के नई जानकारियां मैं आपके लिए ले कर आता रहूं।

Friday, 21 April 2017

इंटरनेट कैसे काम करता है?

इंटरनेट क्या है? (What is internet?)

इंटरनेट कैसे काम करता है? इंटरनेट क्या है?  इंटरनेट का मालिक कौन है? और इसे कौन चलता है? इंटरनेट का  इतिहास क्या है? Amazing facts about internet. Interesting facts about internet. Complete information about internet. Internet in Hindi. How to know about Internet?

देखा जाए तो आज के समय में इंटरनेट के बारे में कौन नहीं जानता होगा।  हम सभी लोग इंटरनेट के बारे में जानते हैं।  लेकिन क्या कभी आपने यह सोचा है कि आखिर इंटरनेट काम कैसे करता है?

क्या आपको इंटरनेट के बारे में पता है? (How does the internet work?)

शायद कुछ लोगों को पता होगा। लेकिन अगर आपको नहीं पता तो आज आप इस लेख को पढ़कर जान जाएंगे कि आखिर इंटरनेट काम कैसे करता है। यह जानकारी आपके लिए बहुत ही महत्वपूर्ण साबित होने वाली है क्योंकि यह जानकारी काफी अहम है। आपको जानकर हैरानी होगी कि इंटरनेट बस एक तरह का एक ऐसा माध्यम है। जो दुनियाभर के सर्वर को लगभग सभी देशो से जोड़ती है। जैसे हाईवे रोड विभिन्न राज्यों को ट्रैवेलिंग के लिए एक दूसरे से जोड़े रखी है। ठीक वैसे ही इंटरनेट एक ग्लोबल प्रणाली है। जो बहुत से कंप्यूटर नेटवर्क्स को मिलाकर बनती है। इंटरनेट समुंदर और जमीन के अंदर से तारों द्वारा फैलाया गया एक ऐसा जाल है। जो दुनिया भर के हर एक व्यक्ति को इंटरनेट से जोड़े रखता है। 

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इंटरनेट का मालिक कौन है? और इसे कौन चलता है? (Who is the owner of the internet? And who does it run?)

आपको जानकर हैरानी होगी इंटरनेट का कोई भी एक मालिक नहीं है। कोई भी दुनिया का व्यक्ति पूरी तरह से इंटरनेट का एकाधिकार मालिक नहीं बन सकता। इंटरनेट नाही किसी एक व्यक्ति का है ना ही किसी एक आर्गेनाईजेशन का। सबसे पहले यह सवाल आता है कि इंटरनेट किस वजह से बनाया गया? तो चलिए जानते हैं।

इंटरनेट का  इतिहास क्या है? (What is the history of the Internet?)

1962 के दशक में यूनाइटेड स्टेट ऑफ़ अमेरिका सरकार के रक्षा विभाग ने इंटरनेट की शुरुआत की थी। यूनाइटेड स्टेट के वैज्ञानिक और मिलिट्री सिक्योरिटी विशेषज्ञ इस बात को लेकर परेशान थे कि अगर सोवियत ने उनके देश के संचार व्यवस्था पर मिसाइल से हमला किया तो सब कुछ एक झटके में खत्म हो सकता था।  क्योंकि अगर उन लोगों ने मिसाइल से हमला किया तो हर प्रकार की संचार व्यवस्था ख़राब हो सकती थी। जिससे यूनाइटेड स्टेट ऑफ़ अमेरिका को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता था।
इन सब चीजों को सोचते हुए  1962 मैं एम.आई.टी. के वैज्ञानिक जिनका नाम J.C.R. था।  उन्होंने इस समस्या का हल बताते हुए गैलेक्टिक नेटवर्क का सुझाव दिया। गैलेक्टिक नेटवर्क यूनाइटेड स्टेट ऑफ़ अमेरिका सरकार और सेना के बीच संपर्क जोडे रखने में सक्षम थी। चाहे संचार व्यवस्था भले ही शत्रु देश द्वारा आक्रमण करके नष्ट कर दिया गया हो।

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इंटरनेट 3 टियर में काम करता है।

  1. सबसे पहले आता है - ग्लोबल
  2. दूसरे नंबर पर आता है - नेशनल 
  3. और तीसरे नंबर पर आता है - लोकल

इन तीनों टियर से जुड़े हुए कंपनियां वह कंपनियां होती हैं।  जो हमें इंटरनेट सर्विस प्रदान करती हैं। अब इस प्रक्रिया को हम एक उदाहरण के द्वारा समझने की कोशिश करते हैं। मान लीजिए आप कोई वेबसाइट इस्तेमाल कर रहे हैं। और उसका सर्वर अमेरिका में कहीं स्थित है। जिसमें ग्लोबल टियर की कंपनी काम करती है। तो वह कंपनियां समुंद्र में अपनी तार बिछा रखी है। जिससे माध्यम से भारत में इंटरनेट आता है। यह काफी थोक के भाव में आता है अर्थात ये काफी सस्ता होता है। उसके बाद नेशनल टियर के कंपनियां काम करते हैं। जैसे एयरटेल, आईडिया, Aircel, वोडाफोन आदि जो हमें इंटरनेट को टुकड़ों में देती हैं। और हमारी स्पीड पर भी कंट्रोल रखती हैं। जैसे 2GB, 4GB और स्पीड भी कंट्रोल करती हैं। जैसे 2 MBPS, 5MBPS, 10 MBPS आदि।

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आसान भाषा में आप कह सकते हैं कि इंटरनेट एक ऐसा माध्यम है।  जो दुनिया भर के सर्वर को एक दूसरे से जोड़ता है और हर घर तक उन सर्वर्स को  लिंक करने की सुविधा प्रदान करता है। इस समय जो आप वेबसाइट पर यह लेख पढ़ रहे हैं। इसका सर्वर कैलिफोर्निया, यूनाइटेड स्टेट्स ऑफ़ अमेरिका में स्थित है। सोचिए इंटरनेट कितना हैरान कर देने वाला चीज है आप भारत में बैठे हुए है और अमेरिका के सर्वर पर काम कर रहे इस वेबसाइट को पढ़ रहे हैं।

आपको इंटरनेट के बारे में यह जानकारी कैसी लगी?

अगर आपको यह जानकारी अच्छी लगी। तो कृपया हमारे वेबसाइट को सब्सक्राइब करना ना भूलें ताकि हम आपके लिए और भी अच्छे-अच्छे जानकारिया आप तक पहुंचा सके। धन्यवाद!

Sunday, 16 April 2017

हम लोग झूठ क्यों बोलते हैं?

हम लोग झूठ क्यों बोलते हैं? हम लोग क्रूर और झूठे क्यों बनते चले जा रहे हैं? क्यों हम लोग दूसरो को नही समझना चाहते? क्यों हम लोग दूसरो के विचार क्यों नही समझना चाहते?  संसार में गलत चीजों का क्या निष्कर्ष निकलेगा?  संसार में हमारे इस तरह के व्यवहार का क्या निष्कर्ष निकलेगा?

आज के समय में अगर देखा जाए लगभग ज्यादा से ज्यादा लोग अपने फायदे के लिए दूसरों से झूठ बोलते हैं। विश्वास नाम की चीज़ पर से लोगों का विश्वास उठता चला जा रहा है। सोचने वाली बात यह है कि आखिर ऐसा क्यों हो रहा है। आज के समय में इंसान एक दूरी से ज्यादा झूठ क्यों बोल रहा है।

हम लोग क्रूर और झूठे क्यों बनते चले जा रहे हैं?

विशेषज्ञों का मानना है कि जैसे-जैसे इंसान विकास के क्षेत्र में अपने पांव बढाता जाएगा। वैसे-वैसे इंसान क्रूर बनता जाएगा क्योकि इस कलयुग में बुराई अपनी पाँव बहुत तेज़ी से जमाती है। हैरान कर देने वाली बात तो यह है कि आज के समय में इंसान अपने फेसबुक प्रोफाइल पर ज्यादा लाइक्स के लिए सेल्फी के चक्कर में अपनी जान तक गवां बैठा है। ऐसी झूठी शान के लिए व्यर्थ चिंता करना क्या ठीक है? अगर आप समाचार देखते होंगे तो आपको पता होगा आये दिन ऐसी घटना अक्सर न्यूज़ चैनल और अखबार में आ जाती है कि सेल्फी लेते हुए किसी मौत हो गयी।

क्यों हम लोग दूसरो के विचार क्यों नही समझना चाहते?

हर कोई अपनी बात दूसरों को सुनाना चाहता है। लेकिन कोई भी इंसान दूसरों की एक भी बात नहीं सुनना चाहता। सभी लोग यही चाहते हैं कि मेरी बात पर अमल किया जाए। बाकी दुनिया भाड़ में जाए। कुछ इस तरह की परिस्थिति उभर कर सामने आ रही है। जिसपर लगाम लगाना मुस्किल होता जा रहा है। अगर ऐसा ही चलता रहा तो न जाने आगे चलकर हमारा समाज और हम लोग कैसे बन जाएंगे।

संसार में हमारे इस तरह के व्यवहार का क्या निष्कर्ष निकलेगा?

सोचकर हंसी आती है की आज की टेक्नोलॉजी हजारों मील दूर बैठे इंसान को नजदीक तो कर देती है लेकिन करीबी लोगों को काफी दूर धकेल देती है। आज के समय में गांव में कोई नहीं रहना चाहता। जहां देखो वहां भागादौड़ी और मारामारी है। सब शहर की तरफ ही अपना उज्जवल भविष्य देखते हैं। आने वाला कल न जाने कैसा होगा सोच कर भी डर लगता है। आपको क्या लगता है। कृपया कमेंट बॉक्स में जरुर बताएं।

Wednesday, 5 April 2017

हमारे जीवन पर सोशल साइट्स का साइड इफेक्ट्स।

सोशल साइट्स का हम सभी पर का हानिकारक प्रभाव। (Side effects of social sites on our life)

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अगर देखा जाए तो आज के समय में सोशल साइट्स का चलन बहुत चरम सीमा पर है। सोशल साइट को इसलिए बनाया गया ताकि लोग एक दूसरे से काफी दूर होने के बावजूद भी एक दूसरे से जुड़े रहें और अपने जीवन से जुड़ी हर वह पल, एहसास और ख़ुशी को फोटो, वीडियो और टेक्स्ट के जरिए वहां शेयर कर सके।

लेकिन देखा जाए तो पूरी दुनिया पे इसका ठीक विपरीत असर हुआ है। पहले लोग खाली समय में एक जगह पर इकठ्ठा होकर आपस में एक दूसरे से बात करते थे। एक दूसरे से अपनी प्रॉब्लम और सुझावों को शेयर करते थे।

यहाँ पढ़े: जीवन बदल देने वाली किताब (Inspirational and motivational books in Hindi)

लेकिन आज का इंसान कंप्यूटर और स्मार्ट फोन पर अपनी आंख गढ़ाए, उन चीजों के बारे में सोचता है जिसे उसे कभी सोचने ही नहीं चाहिए थी। जैसे मेरे सोशल प्रोफाइल स्टेटस पर कितने लोगों ने लाइक किया या कमेंट किया कि नहीं किया। इन्ही सब चीजों के जाल में लोग उलझते ही चले जा रहे हैं। इसकी वजह से हम लोग डिप्रेशन, चिंता, गुस्सा, ईर्ष्या इत्यादि के जाल में पूरी तरह से फसते चले जा रहा है।

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सोशल साइट्स के साइड इफेक्ट्स का कारण (Reason behind side effects of social sites) 

अत्यधिक मोबाइल फोन और कंप्यूटर इस्तेमाल करने की वजह से हम लोग अपना सेल्फ कॉन्फिडेंस लेवल यानि आत्मविश्वास खोते चले जा रहे हैं।  जिसका दुष्परिणाम यह निकलना है कि हमारे पास काबिलियत होते हुए भी अपनी बातों समझा नहीं पाते। इसका कारण यह है कि हम वास्तविक लोगों से कम जुड़े रह रहे हैं। क्योंकि हम अत्याधिक समय इंटरनेट, चैटिंग और सोशल साइट्स पर व्यतीत कर रहे हैं।

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हमें इन सभी चीजों से बाहर निकलना होगा।  इन सब चीजों से बाहर निकलने का एक ही तरीका है और वो तरीका ये हैं कि हमें अपने दोस्तों से और अपने करीबी लोगों से WhatsApp, फेसबुक, ट्विटर और अन्य सोशल साइट पर मिलने के बजाए उनसे हमें खाली समय में मिलना चाहिए और अपनी बातें उनके सामने रखनी चाहिए। जिसे हम वास्तविक जीवन जीने को महसूस कर सकेंगे और जो हमारी कमियाँ हैं वो हमसे दूर हो जायेंगी।

क्या सोशल साइट्स के बारे में ये जानकारी आपको सही लगी?

आप इस बारे में क्या सोचते हैं। कृपया कमेंट बॉक्स में बताइए। अगर आपको यह जानकारी अच्छी लगे तो कृपया इस वेबसाइट के लिंक को अपने दोस्तों और अपने परिवार के लोगों के साथ अवश्य शेयर करें। धन्यवाद।

Saturday, 25 March 2017

हवाई जहाज के बारे में रोचक जानकारियां (Facts about Plane in Hindi)

आप पढ़ रहे हैं हवाई जहाज के बारे में (Amazing and interesting facts about aeroplane)

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अगर देखा जाए, तो आज के समय में हवाई जहाज के बारे में कौन नहीं जानता होगा। सभी लोग हवाई जहाज के बारे में जानते ही होंगे और कई लोगों ने उसमें तो सफर भी किया होगा। ऐसा कोई भी व्यक्ति शायद ही होगा जिसने हवाई जहाज को देखा ना हो।

देखा जाए तो हवाई जहाज के अविष्कार बारे में काफी विवाद है। कई लोग कहते हैं कि 1895 में शिवकर बापूजी तलपडे ने हवाई जहाज का आविष्कार किया था। तो कोई कहता है 1903 में राइट ब्रदर्स में इसका आविष्कार किया।
लेकिन देखा जाये तो तलपड़ेजी ने राइट ब्रदर्स से 8 साल पहले एक हवाई जहाज उड़ान का छोटा सा कारनामा दिखा दिया था। लेकिन इतिहास में उनकी खोज किसी कोने में विलुप्त हो गई और हवाई जहाज के अविष्कार का पूरा श्रेया राइट ब्रदर्स को चला गया। आज हम इस वेबसाइट पर हवाई जहाज के बारे में बात करेंगे तो चलिए शुरू करते हैं।


हवाई जहाज के बारे में रोचक जानकारियां

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विशेषज्ञों का मानना है कि हर रोज पूरे संसार में तकरीबन 2,00,000 जहाज उड़ान भरते हैं जिनमें से केवल दुनिया की 5% जनसंख्या उस हवाई यात्रा में होती है

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विज्ञान और तकनीक इतनी आगे निकल चुकी है की स्वचलित विमान बन चुके हैं। जिस में किसी भी प्रकार की पायलट की कोई जरूरत नहीं होती है। लेकिन फिर भी हवाई जहाज में पायलट को सुरक्षा की दृष्टि से संचालन के लिए रखा जाता है।

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क्या आपको पता है हवाई जहाज का खाना बहुत लोगों को पसंद नहीं आता क्योंकि ज्यादा ऊंचाई पर होने के बाद हमारा खाने-पीने का टेस्ट बदल जाता है। इसलिए हवाई जहाज में मिलने वाले कई प्रकार के भोजन हमें अच्छे नहीं लगते इस वजह से उन सभी भोजनों में नमक ज्यादा डाला जाता है।

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आपको मालूम होना चाहिए कि हवाई जहाज में पारा(mercury) ले जाना सख्त मना है। क्योंकि हवाई जहाज का पूरा स्ट्रक्चर यानी बनावट अल्मुनियम धातु की होती है जबकि मरकरी यानी पारा अल्मुनियम धातु का विरोधक होता है या आसान भाषा में कहे तो पर एल्युमीनियम धातु को नष्ट कर सकता है।

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जानकारी के लिए आपको बता दें कि हवाई जहाज में 200 गैलन का एक टैंक होता है और इसी गैलन के अंदर सारे के सारे टॉयलेट के वेस्टेज इकट्ठा होते हैं।  30 सालों से हवाई जहाजों में वैक्यूम टॉयलेट(vaccum toilet) का इस्तेमाल होता है। जो हमारे मल और पानी को अलग कर देता है। फिर जब हवाई जहाज सफर के बाद एयरपोर्ट पर उतरता है तो उस 200 गैलन टैंक को दूसरे टैंक के जरिये खाली कर दिया जाता है।

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आपकी जानकारी के लिए बता दें कि हवाई जहाज में आप के मोबाइल फ़ोन को एरोप्लेन मोड (Aeroplane mode) या फिर स्विच ऑफ(Switch off) करने के लिए इसलिए कहा जाता है। क्योंकि हवाई जहाज की सारी कम्युनिकेशन सिस्टम नेटवर्क पर कार्यत होती है और सारी निर्देश ट्रैफिक कंट्रोल स्टेशन द्वारा भेजे जाते हैं तथा प्राप्त की जाते हैं।  और यह सारे संचालन व्यवस्था रेडार सिस्टम पर निर्भर करता है।

इसलिए अगर आप मोबाइल यूज करते हैं तो हो सकता है कि कोई जरूरी सूचना कंट्रोल रूम से ना आ पाए या फिर पायलट द्वारा भेजा गया सिग्नल वहां तक ना पहुंच पाए। जिसकी वजह से बहुत बड़ी दुर्घटना हो सकती है। इसलिए जरूरी होता है कि हम मोबाइल फोन को Aeroplane mode में या हवाई जहाज में स्विच ऑफ कर दें या फिर Aeroplane mode में सेट करके कैमरा, म्यूजिक और वीडियो का आनंद ले सकते हैं।

आपको हवाई जहाज के बारे में

जानकारी कैसी लगी। कृपया कमेंट बॉक्स में जरूर बताईये। आशा करता हु  जानकारी आपको अच्छी लगेगी।

Monday, 13 March 2017

Paytm के बारे में पूरी जानकारी (All about Paytm in Hindi)

Paytm के बारे में, आज के समय में कौन नहीं जानता होगा। आज के समय में पेटीएम एक सबसे प्रसिद्ध भारतीय ई-कॉमर्स वेबसाइट बन चुकी है। इसकी शुरुआत सन् 2010 से किया गया था। इस कंपनी का Headquater यानी मुख्यालय नोएडा में है। यह कंपनी बहुत तेजी से सभी प्रकार की ऑनलाइन सर्विसेस से जुड़ती जा रही है।

Paytm कंपनी के बारे में

Paytm कंपनी के संस्थापक विजय शेखर शर्मा हैं। इस कंपनी की शुरुआत One97 communication से स्टार्ट हुआ था। जो पहले मोबाइल और DTH रिचार्ज जैसी सेवाएं प्रदान करता था। सुन् 2012 में paytm ई-कॉमर्स मार्केटिंग में प्रवेश किया जैसे Flipkart, Amazon और Snapdeal कम्पनियाँ सेवा प्रदान करती हैं।

Paytm की शूरुआत 

Paytm की शुरुआत सन 2010 से हुई थी। यह कंपनी पहले सिर्फ मोबाइल रिचार्ज की सर्विसेस ही प्रदान करती थी। उसके बाद यह प्रीपेड मोबाइल, DTH रिचार्ज और अन्य कंपनईयो जैसी ऑनलाइन शॉपिंग जैसी सेवाएं प्रदान करने लग गया।
 

Paytm ने अपना Android और iOS एप्लीकेशन भी लांच किया। जिसकी वजह से लोगों को स्मार्टफोन के जरिए आसानी से फोन रिचार्ज और ऑनलाइन शॉपिंग जैसी सुविधाएंआसानी से मिलने लगी। इस कंपनी के शुरू होने के 3 साल बाद 25 करोड़ यूजर्स और 10 लाख Android एप्लीकेशन डाउनलोड का रिकॉर्ड बना लिया।

Paytm के संस्थापक तथा मालिक (CEO and Founder)

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 नाम  विजय शेखर शर्मा
 जन्मतिथि  8 जुलाई, 1973
 जन्म स्थान  जिला अलीगढ़, उत्तर प्रदेश
 कार्यत पद  Paytm and One97 Communications Limited के संस्थापक