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Wednesday, 1 November 2017

क्या इंसान एलियंस की प्रजाति है?

क्या इंसान एलियंस की प्रजाति है?

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अगर देखा जाए तो इस पृथ्वी ग्रह पर इंसान को छोड़ कर हर एक प्राणी शारीरिक तौर पर काफी ज्यादा विकसित है. हर जानवर के बच्चे जन्म लेते ही कुछ घंटे या फिर कुछ दिन बाद ही चलने-फिरने लगते हैं. लेकिन अगर वही हम इंसानों के शिशु चलने फिरने में महीनों या फिर कुछ साल लग जाते हैं.

ऐसा क्यों है? अगर हम इंसान जानवरों के समय से अगर इस पृथ्वी पर रहते आ रहे हैं. तो हम इस मामले में कैसे उनसे पीछे हो सकते हैं. यह सारी बातें यह दर्शाती हैं कि हम इस पृथ्वी के मूल निवासी नहीं है. बल्कि हमें यहां पर बायोलॉजिकल के माध्यम से किसी उन्नत सभ्यता द्वारा इस पृथ्वी पर विकशित किया गया है.

इंसान का विकास

अगर देखा जाए तो बाकी जानवरों की तुलना में हम इतने विकसित कैसे हो सकते हैं? अगर हम शारीरिक तौर पर उनसे कमजोर हैं. तो बौद्धिक तौर पर उसे इतने मजबूत कैसे हो सकते हैं? वैज्ञानिक अपना कितना भी तर्क इस बारे में दें. लेकिन कुछ ऐसी बातें हैं. जो हमें यह सोचने पर मजबूर कर देती हैं कि हो या ना हो हम इस पृथ्वी के मूल निवासी नहीं है.


क्योंकि इस दुनिया में कोई भी जानवर प्रदूषण नहीं फैलाता, सिवाय इंसान के. तो जाहिर सी बात है जैसे-जैसे हम टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में आगे बढ़ रहे हैं. वैसे-वैसे प्रदूषण भी फैलता जा रहा है. एक समय आएगा जब हम पृथ्वी के वातावरण को पूरी तरह से दूषित कर देंगे. उसके बाद हमारे पास सिर्फ यही चारा रह जाएगा कि हम किसी दूसरे ग्रह पर जाकर निवास करें.


लेकिन अगर होशियार व्यक्ति तो वह यही कहेगा कि जितना विकसित अभी हम इस समय है उतना विकसित स्टेज पर उस ग्रह पर हम निवास ना करें. क्योंकि जो विकास की अवस्था इस समय रहेगी अगर उसी विकास की अवस्था में अगर हम वहां पर निवास करेंगे. तो वहां भी प्रदूषण शुरू हो जाएगा इसलिए वही पुराना चक्र फिर से दोहराना होगा. ताकि इंसान उस ग्रह पर लंबे समय तक निवास कर सकें.

Friday, 13 October 2017

मानव मस्तिक के बारे में रोचक एवं जरूरी जानकारी

मानव मस्तिक के बारे में रोचक एवं जरूरी जानकारी (Interesting Facts About Human Brain in Hindi)

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Pic credit: dailymail.co.uk
मानव मस्तिष्क मानव शरीर में सबसे महत्वपूर्ण अंगों में से एक है। यह हमारी सोच, कारण, याद रखने और नई चीजें सीखने में सहायता करता है। वास्तव में, हमारा मस्तिष्क और उसके बेहतर कामकाज जानवरों और सर्वशक्तिमान की अन्य रचनाओं से भिन्न होता है।

मानव मस्तिष्क के बारे में 10 दिलचस्प तथ्य हैं:

  1. मानव मस्तिष्क का वजन 3 पाउंड होता है.
  2. इसमें 60% वसा शामिल है और यह मानव शरीर में श्रेष्ठ अंगों में से एक है.
  3. मानव मस्तिष्क में जागरण होने पर लगभग 23 वाट बिजली उत्पन्न करने की क्षमता होती है।
  4. हमारे शरीर में कुल रक्त और ऑक्सीजन का उत्पादन होता है, मस्तिष्क का 20% हिस्सा होता है
  5. जब मस्तिष्क को रक्त की आपूर्ति बंद हो जाती है, तो यह लगभग 8-10 सेकंड के बाद होता है कि मस्तिष्क चेतना को खोना शुरू हो जाती है।
  6. मस्तिष्क 5 से 6 मिनट तक जीवित रहने में सक्षम होती है, अगर उसे ऑक्सीजन नहीं मिल जाता है जिसके बाद वह मर जाता है
  7. मस्तिष्क में मौजूद रक्त वाहिकाओं लगभग 100,000 मील लंबा हैं
  8. मस्तिष्क में मौजूद 100 अरब न्यूरॉन्स हैं।
  9. प्रारंभिक गर्भावस्था में, न्यूरॉन्स 250,000 प्रति मिनट की खतरनाक दर से विकसित होता है।
  10.  जैसे-जैसे हम बड़े होते हैं, हम नई चीजों को याद नहीं कर सकते। अमेरिका में शोधकर्ताओं के मुताबिक यह मस्तिष्क पुरानी यादों को फ़िल्टर करने और हटाने में असमर्थ है, जो नए विचारों को अवशोषित करने से रोकते हैं।
  11. मानव मस्तिष्क का वजन केवल 3 एलबीएस का होता है। (लगभग 1.5 किलोग्राम), शरीर के वजन का सिर्फ 2% बना देता है और लगभग 20% शरीर के ऑक्सीजन और रक्त का उपयोग करता है। कुल मस्तिष्क द्रव्यमान का 75% पानी है।
  12. यह शरीर में सबसे बड़ा अंग है, जिसमें 100 अरब न्यूरॉन्स या तंत्रिका कोशिकाएं (पृथ्वी पर कुल मानव आबादी 15 गुना) और एक ट्रिलियन ग्लियाल कोशिकाएं हैं और लगभग 150,000 मील की दूरी पर रक्त वाहिकाओं है।
  13. मस्तिष्क 0.5 एम / सेक के रूप में धीमी गति से सूचनाओं की गति को 120 मीटर / सेकेंड तक धीमा करता है। 4-6 मिनट के लिए मस्तिष्क ऑक्सीजन के बिना जीवित रह सकता है जिसके बाद यह मरना शुरू होता है। 5-10 मिनट के लिए ऑक्सीजन की कमी स्थायी मस्तिष्क क्षति हो सकती है।
  14. मस्तिष्क स्वास्थ्य और कार्य करने के लिए अच्छा पोषण अत्यंत महत्वपूर्ण है। वैज्ञानिकों के अनुसार, परहेज़ ही मस्तिष्क को खुद खाने के लिए मजबूर कर सकते हैं। कुपोषित भ्रूण और शिशुओं को संज्ञानात्मक और व्यवहारिक घाटे, धीमी गति से मोटर और भाषा के विकास और कम IQ से पीड़ित हैं। शिशुओं के दिमाग में कुल ग्लूकोज आपूर्ति का लगभग 50% उपयोग होता है, जो कि बच्चों को इतना सोता है कि एक कारण हो सकता है
  15. शारीरिक व्यायाम केवल मस्तिष्क के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह शेष शरीर के लिए है आंतरिक चिकित्सा के इतिहास में प्रकाशित हाल के एक अध्ययन में यह सुझाव दिया गया है कि व्यायाम उम्र में देरी कर सकता है जिसमें लोगों को 30% से अधिक अल्जाइमर रोग हो सकता है क्योंकि यह सुधार होता है और मस्तिष्क में रक्त के प्रवाह को और नियमित करता है।
  16. एक व्यक्ति के जीन का आधा मस्तिष्क के जटिल डिजाइन के लिए ज़िम्मेदार होते हैं, जो शरीर के शेष 98% के संगठन का वर्णन करते हैं।
  17. यह एक मिथक है कि हम मस्तिष्क के केवल 10% का उपयोग करते हैं, वास्तव में मस्तिष्क के हर हिस्से का एक ज्ञात कार्य है इसके अलावा, कोई भी बाएं / दाएं मस्तिष्क विभाजन नहीं है-वे मिलकर काम करते हैं। और नहीं, मस्तिष्क कोशिकाएं जब भी आप छींकते हैं तब तक मर नहीं जाती हैं।
मानव मस्तिष्क के काम के साथ ही बच्चों के लिए महत्वपूर्ण कार्यों को सिखाने के लिए, आपको मानव मस्तिष्क का एक मॉडल खरीदना होगा।

Friday, 25 August 2017

प्रकाश के बारे में (About Light in Hindi)

प्रकाश के बारे में पूरी जानकरी [हिंदी में]

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नमस्कार! दोस्तों, आज हम इस वेबसाइट पर प्रकाश के बारे में बात करेंगे। यह सारी बातें जनरल नॉलेज के लिए काफी अच्छा है। अगर आप किसी एग्जाम का प्रिपरेशन कर रहे हैं। तो यह सारी बातें जानना आपके लिए काफी फायदेमंद होगा। तो चलिए शुरू करते हैं।

प्रकाश के बारे में उपयोगी एवं रोचक बातें

  1. प्रकाश फोटान नमक छोटे-छोटे कणों से मिलकर बना है।
  2. प्रकाश तरंगे अनुप्रस्थ प्रकार की तरंगे है।
  3. प्रकाश का तरंग सिद्धांत हाईगेंस के द्वारा प्रतिस्थापित किया गया था।
  4. ध्रुवण अर्थात polarization की घटना के कारण प्रकाश तरंगों के अनुप्रस्थ होने की पुष्टि देता है।
  5. मैक्सवेल ने प्रकाश विद्युत चुंबकीय स्वरूप की खोज की थी। 
  6. ग्रेमॉलडी ने सर्वप्रथम यह दिखलाया की प्रकाश तरंगों में विर्वतन(diffraction) होता है।
  7. आइंस्टाइन ने प्रकाश विद्युत प्रभाव का प्रतिपादन किया तथा इसी खोज के कारण उन्हें नोबेल पुरस्कार प्राप्त हुआ था।
  8. ध्रुवण अर्थात Polarization की घटना प्रकाश एवं ध्वनि दोनों में घटित नहीं होती है। विर्वतन, परावर्तन एवं अपवर्तन दोनों में ही होता है।
  9. किसी अवरोध की कोर से प्रकाश का मुड़ना विर्वतन होता है अर्थात deffraction कहलाता है।
  10. व्यतिकरण interference का सिद्धांत प्रकाश की तरंग प्रकृति की पुष्टि करता है।
  11. प्रकाश विकिरण (light radiation) की प्रकृति तरंग एवं कण दोनों एक ही प्रकृति के होते है। 
  12. प्रकाश का चिकने पृष्ठ से टकराकर वापस लौटना प्रकाश का परावर्तन कहलाता है। 
  13. रोमर ने सर्वप्रथम प्रकाश का वेग ज्ञात किया था। 
  14. निर्वात में प्रकाश का वेग अधिकतम होता है।
  15. जल कांच और हीरे में प्रकाश की चाल का क्रम जल > काँच > हीरा होता है।
  16. चंद्रमा से पृथ्वी तक प्रकाश आने में 1 सेकंड का समय लगता है। 
  17. सूर्य से पृथ्वी तक प्रकाश आने में 8 मिनट का समय लगता है। 
  18. माध्यम में तापमान में वृद्धि के साथ प्रकाश की गति में कोई परिवर्तन नहीं होता है। 
  19. सर्वप्रथम न्यूटन ने बताया कि श्वेत प्रकाश सभी रंगों के प्रकाश से मिलकर बना है तथा प्रकाश अत्यंत सूक्ष्म कणों से मिलकर बने हैं तथा सीधी रेखा में गति करते हैं
दोस्तों, आपको यह प्रकाश के बारे में जानकारी कैसी लगी? कृपया नीचे कमेंट बॉक्स में जरूर बताइएगा। और किस टॉपिक पर आप इंफॉर्मेशन चाहते हैं। उस टॉपिक का नाम प्लीज कमेंट बॉक्स में बताइए। हम उस टॉपिक पर एक नया आर्टिकल इस वेबसाइट पर जरुर डालेंगे। धन्यवाद!

Friday, 18 August 2017

सौरमंडल के बारे में [About Solar System in Hindi]

सौरमंडल के बारे में [About Solar System in Hindi]

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सूर्य तथा उसके चारों ओर गुरुत्वाकर्षण के कारण भ्रमण करने वाले ग्रहों उपग्रहों आदि को सौरमंडल कहते हैं। अर्थात सूर्य का परिवार सौरमंडल कहलाता है।

सौरमंडल को अंग्रेजी में हम सोलर सिस्टम कहते हैं। सौरमंडल का मुखिया सूर्य है। सूर्य एक तारा है। सौरमंडल में ग्रहों की संख्या 9 थी लेकिन वर्तमान में ग्रहों की संख्या 8 है। नौवां ग्रह प्लूटो को 24 अगस्त सन 2006 को हमारे सौरमंडल के ग्रहों की श्रेणी से हटा दिया।

सूर्य सौरमंडल का मुखिया है। इसमें हाइड्रोजन 71 प्रतिशत तथा हीलियम 26.5 प्रतिशत व अन्य गैसों की प्रधानता है। इसका व्यास 13,92,200 किलोमीटर है। सूर्य के प्रकाश को पृथ्वी तक पहुंचने में 8 मिनट 20 सेकंड का समय लगता है। प्रकाश की चाल 3×10^8 km/s होता है।

सूर्य अपने अक्ष पर पूर्व से पश्चिम घूमता है। इसका मध्य 23 दिनों में तथा अध्रुवीय 35 दिनों में एक घुर्णन करता है। सूर्य के केंद्र पर नाभिकीय संलयन होता है। जो सूर्य की उर्जा का स्रोत है। पृथ्वी से इसकी दूरी 13 करोड किलोमीटर है। यह पृथ्वी का सबसे निकटतम तारा है। सूर्य की किरणों की गति 300000 किलोमीटर प्रति सेकंड है। सूर्य की अभी तक की आयु 5 अरब वर्ष है.

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क्या पृथ्वी को एलियंस से खतरा है?

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पृथ्वी को एलियंस से खतरा है

इस ब्रम्हांड में हम इंसान यह मानते हैं कि हमारे पृथ्वी के अलावा भी क्या कोई ऐसा ग्रह है। जहां पर हमारी तरह जीव जंतु रहते हैं। हो सकता है वह जीव टेक्नोलॉजी और विज्ञान के मामले में हमसे लाखों साल पीछे हो या फिर यह भी हो सकता है कि वह विकास के मामले में हम से कहीं ज्यादा उन्नत हो। क्या एलियंस सच में होते हैं?

पृथ्वी से एलियंस को सिग्नल भेजना

पृथ्वी से हर रोज न जाने कितने सिग्नल इस ब्रह्माण्ड में भेजे जाते हैं। जो यह पता करने के लिए होते हैं कि इस ब्रम्हांड में क्या कोई और भी ऐसा ग्रह है जहां जीव रहते है। ब्लैक नाइट सैटेलाइट (एलियंस का खुफिया उपग्रह)

लेकिन अगर सोचा जाए। तो हम इन 150 सालों में टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में इतने आगे बढ़ चुके हैं। जिसकी वजह से न जाने कितना प्रदूषण इस वातावरण में फैल चुका है। और हर रोज फैलता ही जा रहा है। तो सोचिए अगर कोई हमसे कही ज्यादा उन्नत सभ्यता इस ब्रम्हांड में मौजूद है। तो उनके ग्रह का क्या हालत हुआ होगा।
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एलियंस पृथ्वी के लिए खतरा साबित हो सकते हैं

अगर हम उनको सॅटॅलाइट के जरिये संदेश दे रहे हैं कि यहां इस पृथ्वी पर मानव जाति का वास है। तो यह हमारे लिए खतरनाक साबित हो सकता है। क्योंकि हमारे पास अभी भी प्राकृतिक कई संसाधन उपस्थित हैं। अगर किसी और उन्नत सभ्यता हमारे ग्रह के बारे में जान लिया। ऊपर से उनको सिग्नल भेजकर यह बताना है कि हम यहां पृथ्वी पर रहते हैं। तो यह हमारे लिए सबसे बड़ी बेवकूफी होगी।

क्योंकि अगर उस ग्रह की प्रजाति हमसे हजारों साल टेक्नोलॉजी और ज्ञान के क्षेत्र में आगे हैं। तो उनके लिए हम मातृ कीड़े मकोड़े के समान होंगे। क्योंकि वह पल भर में हमारे पृथ्वी पर कब्जा करने की छमता रख सकते हैं। और हमारे संसाधन का उपयोग अपने ग्रह के लिए कर सकते हैं।

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अगर उनको यह पता चल जाता है कि हमारे पृथ्वी पर भारी मात्रा में प्राकृतिक संसाधन है। तो उन संसाधनों का उपयोग वह अपने ग्रह के लिए तथा अपने लोगों के भलाई के लिए कर सकते हैं। जिसका बहुत भारी नुकसान हम पृथ्वी वासियों को भुगतना हो सकता है।

आपका एलियंस के बारे में क्या मानना है?

इसीलिए मेरा मानना है कि हमें इस तरह के सिग्नल को कभी इस ब्रह्माण्ड में नहीं भेजना चाहिए। जिससे किसी और ग्रह की उन्नत सभ्यताएँ यह जान जाएं कि हम यहां इस पृथ्वी पर रहते हैं। भगवान ने हमें जितना दिया है। उतने में ही हमें खुश रहना चाहिए। तथा इस पूरे मानव जाति की सुरक्षा एवं पृथ्वी की सुरक्षा के बारे में हमें सोचना चाहिए। क्योंकि किसी ने यह सत्य कहा है कि मानव जाति का विकास ही विनाश का कारण बनेगा।

Sunday, 13 August 2017

भारत में हुए परमाणु परीक्षण के बारे में

परमाणु परीक्षण के बारे में पूरी जानकारी

Dr. A.P.J. Abdul Kalam, Atal Bihari Vajpayee and Team
नमस्कार! दोस्तो,आज हम भारत में हुए परमाणु परीक्षण के बारे में बात करेंगे। भारत में पहली बार परमाणु परीक्षण 18 मई 1974 में पोखरण (जैसलमेर-राजस्थान) में किया गया था। यह परमाणु बम भारत में ही बना था। इस परमाणु बम की कुल क्षमता 12 किलोटन थी।

भारत में दूसरा परमाणु परीक्षण

फिर भारत ने दूसरी बार परमाणु परीक्षण 11 मई व 13 मई 1998 में जैसलमेर जिले के खेतोलोई  गांव के करीब किया था। जिसे शक्ति-98 नाम दिया गया। इस परमाणु बम का सफल परीक्षण सुपर कंप्यूटर की मदद से किया गया। इसकी वजह से भारत सुपर कंप्यूटर द्वारा परमाणु परीक्षण करने में सफल रहा तथा सुपर कंप्यूटर की मदद से इसके संचालन करने की क्षमता हासिल कर लिया।

तत्व जो परमाणु परीक्षण में उपयोग किये गए

शायद आप नहीं जानते, 1974 के पोखरण परमाणु विस्फोट में प्लूटोनिक का उपयोग किया गया था। जबकि वर्ष 1998 में हुए विस्फोट में परिवर्धित यूरेनियम से लेकर ट्रिटियम ड्यूटीरियम तक का उपयोग किया गया था।

आशा करता हूं। यह जानकारी आपको अच्छी लगेगी। अगर आपको और भी परमाणु परीक्षण से जुड़ी जानकारी चाहिए। तो कृपया नीचे कमेंट बॉक्स में लिखिए। मैं ऐसे ही जानकारी इस वेबसाइट पर लेकर आता रहूंगा। और आपको उपयोगी जानकारियां देता रहूंगा। अब तक के लिए धन्यवाद!

Friday, 11 August 2017

About GPS (Global Positioning System) in Hindi

About GPS: Know in Hindi

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देखा जाए तो आज के समय में GPS का इस्तेमाल काफी आम बात हो गया है। एक समय था, जब GPS का इस्तेमाल सिर्फ सेना को सही लोकेशन की जानकारी देने के लिए इस्तेमाल किया जाता था। लेकिन आज के समय में GPS हर मोबाइल फोन में, लैपटॉप में और भी अन्य गैजेट्स में देखने को मिल जाते हैं।

जैसा की हम जानते हैं GPS सैटेलाइट के आधार पर काम करता है। GPS का पूरा नाम ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम है। यह एक सबसे विस्तृत नेविगेशन सिस्टम है। जो समय के साथ-साथ किसी भी व्यक्ति, वाहन या सामान का सही लोकेशन बताता है।

यहाँ पढ़े: इंटरनेट कैसे काम करता है?

शायद आप नहीं जानते GPS को सबसे पहले यूनाइटेड स्टेट ऑफ अमेरिका के सेना विभाग ने बनाया था। फिर बाद में इस का इस्तेमाल आम लोगों के लिए उपलब्ध करा दिया गया। जीपीएस के जरिए आज के समय में आप आसानी से पूरे दिन का मौसम के बारे में जान सकते हैं।

GPS डिवाइस रिसीवर के साथ काम करता है। मतलब जो भी डाटा हमें सेटेलाइट से मिलता है। वह जीपीएस रिसीवर डिवाइस और सेटेलाइट मिल उसकी गणना करते है।

जरूर पढ़े: हमारे जीवन पर सोशल साइट्स का साइड इफेक्ट्स।

GPS काम कैसे करता है?

आपका जीपीएस डिवाइस 3 से 4 सैटेलाइट से लोकेशन की जानकारी लेता है। जिसकी accuracy 10 से 100 मीटर के रेंज में हो सकती है। आज के समय में एंड्राइड डेवलपर GPS का इस्तेमाल कई Android एप्लीकेशन में करते हैं। जैसा कि हमने देखा है अक्सर हम अपने मोबाइल फोन में कोई सॉफ्टवेयर ओपन करते हैं। तो वह एंड्राइड एप्लीकेशन लोकेशन ऑन करने के लिए कहता है। इसका मतलब यह है कि वह एप्लीकेशन चाहता है कि आप अपना करंट लोकेशन उसके साथ शेयर करें।

यहाँ पढ़े: About 1G, 2G, 3G, 4G and 5G Technology in Hindi

जीपीएस लोकेशन कैसे पता करता है?

किसी भी जगह का लोकेशन पता करने के लिए कम से कम तीन सैटेलाइट की आवश्यकता होती है। जो 2D दो डायमेंशनल पोजीशन पता करती है। लेकिन अगर वही आप 3D में जाना चाहते हैं यानि की लंबाई चौड़ाई के साथ-साथ ऊंचाई और गहराई भी देखना चाहते हैं। तो उसके लिए कम से कम चार सैटेलाइट की आवश्यकता होती है। एक बार यह सारी जानकारियां सैटेलाइट को पता हो जाती है। तो सैटेलाइट आपके जीपीएस रिसीवर से कँनेट हो जाता है। और अंय कई चीजों की गणना करना वह शुरू कर देता है। जैसे आपकी गति, दूरी, आप एक जगह से दूसरी जगह जाने में आपको कितना समय लगेगा, व सारी घटना जो आपके लिए काफी जरूरी होती है।

अवश्य पढ़े: भविष्य में होने वाले बदलाव (Facts About Future)

आशा करता हूं यह जानकारी आपको अच्छी लगी होगी। अगर आपको GPS के बारे में जानकारी अच्छी लगे। तो कृपया इसको शेयर करिए। अगर आपके मन में किसी भी प्रकार का प्रश्न है। तो नीचे कमेंट बॉक्स में अपने question को लिखिए। धन्यवाद!