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Wednesday, 26 October 2016

पिकासो(Picasso): एक मोटिवेशनल कहानी

मंजिल उन्हीं को मिलती है जिनके सपनों में जान होती है!


A story of Picasso and a woman (Motivational Story)

पिकासो(Picasso) स्पेन में जन्में एक बहुत मशहूर चित्रकार थे। उनकी पेंटिंग दुनिया भर में करोड़ों और अरबों रुपयों में बिका करती थीं। एक दिन रास्ते से गुजरते समय एक महिला की नजर पिकासो पर पड़ी और संयोग से उस महिला ने उन्हें पहचान लिया।


वो दौड़ी हुई उनके पास आयी और बोली – सर मैं आपकी बहुत बड़ी फैन हूँ। आपकी पेंटिंग्स मुझे बहुत ज्यादा पसंद हैं। क्या आप मेरे लिए भी एक पेंटिंग बनायेंगे ?पिकासो हँसते हुए बोले  मैं यहाँ खाली हाथ हूँ मेरे पास कुछ नहीं है मैं फिर कभी आपके लिए पेंटिंग बना दूंगा। लेकिन उस महिला ने भी जिद पकड़ दी कि मुझे अभी एक पेंटिंग बना के दो, बाद में पता नहीं आपसे मिल पाऊँगी या नहीं।पिकासो ने जेब से एक छोटा सा कागज निकाला और अपने पेन से उसपे कुछ बनाने लगे।


करीब 10 सेकेण्ड के अंदर पिकासो ने पेंटिंग बनायीं और कहा ये लो ये मिलियन डॉलर की पेंटिंग है।उस लड़की को बड़ा अजीब लगा कि पिकासो ने बस 10 सेकेण्ड में जल्दी से एक काम चलाऊ पेंटिंग बना दी और बोल रहे हैं कि मिलियन डॉलर की पेंटिग है। उस औरत ने वो पेंटिंग ली और बिना कुछ बोले अपने घर आ गयी।उसको लगा पिकासो उसका पागल बना रहा है, इसलिए वो मार्किट गयी और उस पेंटिंग की कीमत पता की। और उसे बड़ा आश्चर्य हुआ कि वो पेंटिंग वास्तव में मिलियन डॉलर की थी।


वो भागी भागी एक बार फिर पिकासो के पास आयी और बोली – सर आपने बिलकुल सही कहा था ये तो मिलियन डॉलर की ही पेंटिंग है। पिकासो ने हँसते हुए कहा कि मैंने तो आपसे पहले ही कहा था।वो महिला बोली  सर आप मुझे अपनी स्टूडेंट बना लीजिये और मुझे भी पेंटिंग बनानी सीखा दीजिये। जैसे आपने 10 सेकेण्ड में मिलियन डॉलर की पेंटिंग बना दी, वैसे मैं भी 10 सेकेण्ड में ना सही 10 मिनट में ही अच्छी पेंटिंग बना सकूँ। मुझे ऐसा बना दीजिये।पिकासो ने हँसते हुए कहा ये जो मैंने 10 सेकेण्ड में पेंटिंग बनायीं है इसे सीखने में मुझे 30 साल का समय लगा।


मैंने अपने जीवन के 30 साल सीखने में दिए तुम भी दो, सीख जाओगी।वो महिला अवाक् निःशब्द होकर पिकासो को देखती रह गयी।दोस्तों जब हम दूसरों को सफल होता देखते हैं तो हमें ये सब बड़ा आसान लगता है। हमको लगता है कि यार ये इंसान को बड़ी जल्दी और बड़ी आसानी से सफल हो गया। लेकिन मेरे दोस्त उस एक सफलता के पीछे ना जाने कितने सालों की मेहनत छिपी है ये कोई नहीं देख पाता।सफलता तो बड़ी आसानी से मिल जाती है लेकिन सफलता की तैयारी में अपना जीवन कुर्बान करना होता है।


जो लोग खुद को तपाकर, संघर्ष करके अनुभव हासिल करते हैं वो कामयाब हो जाते हैं और दूसरों को लगता है कि ये कितनी आसानी से सफल हो गया।मेरे दोस्त एग्जाम तो केवल 3 घंटे का होता है लेकिन उस 3 घण्टे के लिए पूरी साल तैयारी करनी पड़ती है। तो फिर आप रातों रात सफल होने का सपना कैसे देख सकते हो। सफलता अनुभव और संघर्ष मांगती है और अगर आप देने को तैयार हैं तो आपको आगे जाने से कोई नहीं रोक सकता।


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Tuesday, 27 September 2016

A motivational and inspirational Hindi story

एक राजा और तीन बालक


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Hindi Story of A King and Three Children

एक बार एक शक्तिशाली राजा घने वन में शिकार खेल रहा था। अचानक आकाश में बादल छा गए और मूसलाधार वर्षा होने लगी। सूर्य अस्त हो गया और धीरे-धीरे अँधेरा छाने लगा। अँधेरे में राजा अपने महल का रास्ता भूल गया और सिपाहियों से अलग हो गया। भूख प्यास और थकावट से व्याकुल राजा जंगल के किनारे एक टीले पर बैठ गया। थोड़ी देर बाद उसने वहाँ तीन बालकों को देखा।

तीनों बालक अच्छे मित्र थे। वे गाँव की ओर जा रहे थे। सुनो बच्चों! ‘जरा यहाँ आओ।’ राजा ने उन्हें बुलाया। बालक जब वहाँ पहुंचे तो राजा ने उनसे पूछा – ‘क्या कहीं से थोड़ा भोजन और जल मिलेगा?’ मैं बहुत प्यासा हूँ और भूख भी बहुत लगी है।


बालकों ने उत्तर दिया – ‘अवश्य ‘। हम घर जा कर अभी कुछ ले आते है। वे गाँव की ओर भागे और तुरंत जल और भोजन ले आये। राजा बच्चों के उत्साह और प्रेम को देखकर बहुत प्रसन्न हुआ।

राजा बोला – “प्यारे बच्चों! तुम लोग जीवन में क्या करना चाहते हो? मैं तुम सब की सहायता करना चाहता हूँ।”

कुछ देर सोचने के बाद एक बालक बोला – ‘ मुझे धन चाहिए। मैंने कभी दो समय की रोटी नहीं खायी है। कभी सुन्दर वस्त्र नहीं पहने है इसलिए मुझे केवल धन चाहिए। राजा मुस्कुरा कर बोले – ठीक है। मैं तुम्हें इतना धन दूँगा कि जीवन भर सुखी रहोगे। यह शब्द सुनते ही बालकों की ख़ुशी का ठिकाना न रहा।


दूसरे बालक ने बड़े उत्साह से पूछा – “क्या आप मुझे एक बड़ा-सा बँगला और घोड़ागाड़ी देंगे?’ राजा ने कहा – अगर तुम्हे यही चाहिए तो तुम्हारी इच्छा भी पूरी हो जाएगी।

तीसरे बालक ने कहा – “मुझे न धन चाहिए न ही बंगला-गाड़ी। मुझे तो आप ऐसा आशीर्वाद दीजिए जिससे मैं पढ़-लिखकर विद्वान बन सकूँ और शिक्षा समाप्त होने पर मैं अपने देश की सेवा कर सकूँ। तीसरे बालक की इच्छा सुनकर राजा बहुत प्रभावित हुआ। उसने उसके लिए उत्तम शिक्षा का प्रबंध किया। वह परिश्रमी बालक था इसलिए दिन-रात एक करके उसने पढाई की और बहुत बड़ा विद्वान बन गया और समय आने पर राजा ने उसे अपने राज्य में मंत्री पद पर नियुक्त कर लिया।

एक दिन अचानक राजा को वर्षों पहले घटी उस घटना की याद आई। उन्होंने मंत्री से कहा, ” वर्षों पहले तुम्हारे साथ जो दो और बालक थे, अब उनका क्या हाल-चाल है… मैं चाहता हूँ की एक बार फिर मैं एक साथ तुम तीनो से मिलूं, अतः कल अपने उन दोनों मित्रों को भोजन पर आमंत्रित कर लो।”


मंत्री ने दोनों को संदेशा भिजवा दिया और अगले दिन सभी एक साथ राजा के सामने उपस्थित हो गए।

‘आज तुम तीनो को एक बार फिर साथ देखकर मैं बहुत प्रसन्न हूँ। इनके बारे में तो मैं जानता हूँ…पर तुम दोनों अपने बारे में बताओ। “, राजा ने मंत्री के कंधे पर हाथ रखते हुए कहा।

जिस बालक ने धन माँगा था वह दुखी होते हुए बोला, “राजा साहब, मैंने उस दिन आपसे धन मांग कर बड़ी गलती की। इतना सारा धन पाकर मैं आलसी बन गया और बहुत सारा धन बेकार की चीजों में खर्च कर दिया, मेरा बहुत सा धन चोरी भी हो गया ….और कुछ एक वर्षों में ही मैं वापस उसी स्थिति में पहुँच गया जिसमे आपने मुझे देखा था।”




बंगला-गाडी मांगने वाले बालक भी अपना रोना रोने लगा, ” महाराज, मैं बड़े ठाट से अपने बंगले में रह रहा था, पर वर्षों पहले आई बाढ़ में मेरा सबकुछ बर्वाद हो गया और मैं भी अपने पहले जैसी स्थिति में पहुँच गया।

उनकी बातें सुनने के बाद राजा बोले, ” इस बात को अच्छी तरह गाँठ बाँध लो धन-संपदा सदा हमारे पास नहीं रहते पर ज्ञान जीवन-भर मनुष्य के काम आता है और उसे कोई चुरा भी नहीं सकता। शिक्षा ही मानव को विद्वान और बड़ा आदमी बनाती है, इसलिए सबसे बड़ा धन “विद्या” ही है।


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Saturday, 17 September 2016

कौन सबसे बड़ा दानी? (कृष्णा और अर्जुन) Short Story in Hindi

कौन सबसे बड़ा दानी? (कृष्णा और अर्जुन) Short Story in Hindi of Krishna and Arjuna

Inspirational Story of Krishna and Arjuna in Hindi. कौन सबसे बड़ा दानी? (कृष्णा और अर्जुन) Short Story in Hindi of Krishna and Arjuna.

Inspirational Story of Krishna and Arjuna in Hindi

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एक बार कृष्ण और अर्जुन कहीं जा रहे थे,

तभी बातों बातों में अर्जुन ने कृष्ण से कहा कि क्यों कर्ण को दानवीर कहा जाता है और उन्हें नहीं। जबकि दान हम भी बहुत करते हैं।

यह सुन कर कृष्ण ने दो पर्वतों को सोने में बदल दिया,

और अर्जुन से कहा कि वे उनका सारा सोना गाँव वालो के बीच बाट दें ।

जरूर पढ़े: Motivational Quotes by Sandeep Maheshwari (Hindi)

तब अर्जुन गाँव गए और सारे लोगों से कहा कि वे पर्वत के पास जमा हो जाएं क्योंकि वे सोना बांटने जा रहे हैं,

यह सुन गाँव वालो ने अर्जुन की जय जयकार करनी शुरू कर दी और अर्जुन छाती चौड़ी कर पर्वत की तरफ चल दिए।

दो दिन और दो रातों तक अर्जुन ने सोने के पर्वतों को खोदा और सोना गाँव वालो में बांटा । पर पर्वत पर कोई असर नहीं हुआ।

इसी बीच बहुत से गाँव वाले फिर से कतार में खड़े होकर अपनी बारी आने का इंतज़ार करने लगे। अर्जुन अब थक चुके थे लेकिन अपने अहंकार को नहीं छोड़ रहे थे।


उन्होंने कृष्ण से कहा कि अब वे थोड़ा आराम करना चाहते हैं और इसके बिना वे खुदाई नहीं कर सकेंगे ।

तब कृष्ण ने कर्ण को बुलाया और कहा कि सोने के पर्वतों को इन गाँव वालों के बीच में बाट दें।

कर्ण ने सारे गाँव वालों को बुलाया और कहा कि ये दोनों सोने के पर्वत उनके ही हैं और वे आ कर सोना प्राप्त कर लें । आैर एेसा कहकर वह वहां से चले गए।।

अर्जुन भौंचक्के रह गए और सोचने लगे कि यह ख्याल उनके दिमाग में क्यों नहीं आया।

यहाँ देखें : Motivational Facts and Inspirational Thoughts Photos in Hindi

तब कृष्ण मुस्कुराये और अर्जुन से बोले कि तुम्हें सोने से मोह हो गया था

और तुम गाँव वालो को उतना ही सोना दे रहे थे जितना तुम्हें लगता था कि उन्हें जरुरत है। इसलिए सोने को दान में कितना देना है इसका आकार तुम तय कर रहे थे।

लेकिन कर्ण ने इस तरह से नहीं सोचा और दान देने के बाद कर्ण वहां से दूर चले गए । वे नहीं चाहते थे कि कोई उनकी प्रशंसा करे और ना ही उन्हें इस बात से कोई फर्क पड़ता था कि कोई उनके पीछे उनके बारे में क्या बोलता है।


निष्कर्ष (Conclusion of this story)

यह उस व्यक्ति की निशानी है जिसे आत्मज्ञान हासिल हो चुका है। दान देने के बदले में धन्यवाद या बधाई की उम्मीद करना उपहार नहीं सौदा कहलाता है।

Tuesday, 6 September 2016

A Short Inspirational Story in Hindi

"विशेषता से ऊपर अनुभव है"

नमस्कार दोस्तों! आज मैं www.hindistudy.in पर एक छोटी सी inspirational story शेयर करने जा रहा हूँ। आशा करता हूँ। आपको पसंद आएगा।

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 A Short Inspirational Story in Hindi

एक कार कंपनी में ऑटोमोबाइल इंजिनियर ने एक वर्ल्ड क्लास कार डिज़ाइन की। कंपनी के मालिक ने कार की डिजाईन बेहद पसंद की और इंजिनियर की खूब तारीफ की।

जब पहली कार की टेस्टिंग होनी थी तो कार को फैक्ट्री से निकालते समय उसे अहसास हुआ कि कार शटर से बाहर निकल ही नहीं सकती थी, क्योंकि कार की ऊंचाई गेट से कुछ इंच ज़्यादा थी। इंजिनियर को निराशा हुई कि उसने इस बात का ख्याल क्यों नहीं किया।

जरूर पढ़े: 10 Best Motivational Quotes in Hindi(हिंदी)

इसके दो उपाय सूझे:

 A Short Inspirational Story in Hindi

पहला, कार को बाहर निकालते समय गेट की छतसे टकराने के कारण जो कुछ बम्प, स्क्रैच आदि आएं, उन्हें बाहर निकलने के बाद रिपेयर किया जाये। पेंटिंग सेक्शन इंजिनियर ने भी सहमति दे दी, हालाँकि उसे शक था कि कार की खूबसूरती वैसी ही बरक़रार रहेगी।

कंपनी के जनरल मैनेजर ने सलाह दी कि गेट का शटर हटाकर गेट के ऊपरी हिस्से को तोड़ दिया जाय। कार निकलने के पश्चात गेट को रिपेयर करा लेंगे।

यहाँ देखें : Motivational Facts and Inspirational Thoughts Photos in Hindi

यह बात कंपनी का गार्ड सुन रहा था। उसने झिझकते हुए कहा कि अगर आप मुंझे मौका दें तो शायद मैं कुछ हल निकाल सकूँ। मालिक ने बेमन से उसे स्वीकृति दी।

गार्ड ने चारों पहियों की हवा निकाल दी, जिससे कार की ऊंचाई 3-4 इंच कम हो गयी और कार बड़े आराम से बाहर निकल गयी।

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निष्कर्ष (Conclusion of this story)

किसी भी समस्या को हमेशा एक्सपर्ट की तरह ही न देखें। एक आम आदमी की तरह भी समस्या का बढ़िया हल निकल सकता है।