भारत उन्नति की राह पर कैसे बढ़ेगा?


 भारत में अगर देखा जाए तो समाज में धर्म और जाति लोगों को इस तरह से जकड़े हुए हैं की उनके दिमाग पर अभी भी काफी हद तक इसका प्रभाव देखने को मिलता है. इस लिए यह सोचना काफी ज्यादा जरूरी है कि "भारत उन्नति की राह पर कैसे बढ़ेगा?"

धर्म और जाति को उन्नति से जोड़ना.

हमें समझना होगा कि जब भी कोई बच्चा पैदा होता है. तो वह कोई धर्म जाति विशेष से तब तक नाता नहीं रखता जब तक हम उसके दिमाग में इन बातों को ना डाला गया हो. हम समाज में धर्म जाति के जाल में इस तरह से फंसे हुए हैं कि जब तक हम इस से बाहर नहीं निकलेंगे तब तक हम कभी भी उन्नति नहीं कर सकते.

इसलिए हमें यह चीज समझना होगा अगर भारत को हम उन्नत देशों की श्रेणी में देखना चाहते हैं. तो हमें यह छोटी सोच अपने अंदर से निकालनी होगी. कोई भी इंसान छोटा जाति की वजह से छोटा नहीं हो सकता. कोई भी इंसान उच्च जाति की वजह से महान नहीं हो सकता. बल्कि हमें व्यक्ति का उसके कर्मों के हिसाब से इस समाज में आकलन करना चाहिए.

उन्नत श्रेणी में स्थान बनने के लिए सही निर्णय लेना जरूरी है.

हम देश-विदेशों की बातें करते हैं और कहते हैं कि वह देश भारत से काफी आगे है और हमें सब संसाधन उन देशों जैसा चाहिए. लेकिन ऐसा होगा कैसे जब तक कि हम वही छोटी-सोच और धर्म-जाति की गलत मानशिकता इस समाज में लेकर चलते रहेंगे. इसलिए हमें इन चीजों का आज से ही त्याग कर देना चाहिए. किसी भी इंसान को उसके आचरण और ज्ञान के अनुसार आकलन करना चाहिए ना कि धर्म और जाति विशेष से.

राजनीतिक चलन भारत विकास में एक रोड़ा है.

हमारे देश का दुर्भाग्य है कि यहां के राजनीतिक नेता जाति धर्म का दुरुपयोग करके हमारे समाज पर अपना साम्राज्य स्थापित करते हैं. और लोगों को आपस में लड़ा कर अपने आपको राज गद्दी पर बैठाते. देखा जाए तो उन राजनीतिक नेताओं के लिए कोई धर्म कोई जात मायने नहीं रखता. उनको जहां ज्यादा मुनाफा दिखेगा. वहां जाकर उस स्थान के लोगों का चरण धोकर पानी भी पीना पड़े तो वह पिएगा. और एक बार जीत हासिल कर लेने के बाद वह आपको एक चींटी से भी तुच्छ प्राणी की तरह व्यवहार करेगा. इसलिए यह हमें जानना बहुत जरूरी है की सरकार कोई भी हो सबसे पहले हमें अपने आप को बदलना होगा तब जाकर धीरे-धीरे सब कुछ ठीक हो जाएगा.

सपोर्ट करे उन लोगों का जो समाज के लिए अच्छा कर रहे है.

जो लोग आज समाज में गलत सोच और नियम का विरोध कर रहे है. लोग उनका बहिष्कार कर रहे हैं. हमें उनका बहिष्कार की जगह उन्हें सहायता प्रदान करनी चाहिए. वह इस समाज में और इस देश में एक अच्छा बदलाव लेकर आना चाहते हैं. यह लोकतांत्रिक देश है. इसलिए हमें ही इस देश को बदलना होगा.

इस विषय पर मेरा आखरी शब्द.

मैं आज यहां जो भी कुछ लिख रहा हूं. जो भी कुछ समझाना चाह रहा हूं. मुझसे पहले बहुत लोगों ने इस विषय पर लिखा और समझाने की कोशिश की. लेकिन बहुत कम लोगों तक ही वह समझ और एक अच्छी सोच पहुंच सकी है. अगर आपको मेरी बात अच्छी लगे तो इस वेबसाइट पेज को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक जरूर शेयर करिए. क्योंकि बदलाव जो है हम से ही शुरू होगा. जब तक हम नहीं चाहेंगे. तब तक बदलाव होना इस समाज में नामुमकिन है. आशा करता हूं. यह संदेश का सही अर्थ आप समझ चुके होंगे. धन्यवाद!

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