धूमकेतु या पुच्छल तारा क्या है? (About Comets in Hindi)

Pic credit: www.jpl.nasa.gov

About Comets in Hindi: Comet शब्द की उत्पत्ति ग्रीक भाषा के शब्द Aster Komates से हुई है. जिसका अर्थ है लंबे बाल वाला तारा। इसका लम्बा बाल इसमें पाई जाने वाली एक पूंछ होती है जो कि हवा में उड़ते हुए लम्बे बाल की तरह लगती है।

यह पूँछ एक नाभिक से निकलती है। यह धूमकेतु की सामान्य रूप से दिखाई पड़नेवाली संरचना है। लेकिन धूमकेतु की संरचना सदैव ऐसी नहीं होती। उसकी पूंछ सूर्य के नजदीक आने पर ही दिखाई पड़ती है।

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धूमकेतु या पुच्छल तारा (Comets) क्या है?

प्लूटो के बाद का क्षेत्र धूमकेतु क्षेत्र है जिसके बाद गहन अंतरिक्ष शुरु हो जाता है। एक धूमकेतु मुख्य रूप से बर्फ व धूलकणों का बना होता है।

यह बर्फ, मिथेन, अमोनिया, कार्बन डाईऑक्साइड, जल इत्यादि के जमने से बना होता है। इस बर्फ में कुछ चट्टानें भी जमी रहती हैं। यह धूमकेतु सूर्य के चारों ओर एक दीर्घवृत्तीय (elliptical) कक्षा में घूमता रहता है।

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धूमकेतु इस प्रकार सूर्य का चक्कर लगाते हैं कि इसकी पूंछ (tail) का फैलाव सदैव सूर्य के विपरीत दिशा में रहता है तथा सिर (head or coma ) सूर्य की ओर रहता है।

धूमकेतु के बारे में पूरी जानकारी (About Comets in Hindi)

सामान्यतया इसकी कक्षा काफी लंबी होती है, इसीलिए कई वर्षों बाद दिखाई पड़ता है। इसी लंबे अंतराल के कारण पहले ऐसा समझा जाता था कि धूमकेतु दुबारा आते ही नहीं हैं लेकिन सर्वप्रथम एडमण्ड हेली ने यह सिद्ध किया कि धूमकेतु काफी लंबे अंतराल के बाद आते हैं।

हेली धूमकेतु (Halley's Comet) प्रमुख एक धूमकेतु है जो कि अंतिम बार 1986 में दिखायी दिया था । यह धूमकेतु 75.81 वर्ष (लगभग 76 वर्ष ) बाद दिखाई देता है। अब यह 2062 में दिखायी पड़ेगा।

जैसे ही धूमकेतु आंतरिक सौर मंडल में प्रवेश करता है, सूर्य की गर्मी से इस पर आच्छादित बर्फ पिघलने लगती है और गैस बनने लगती है जिसके कारण यह गैस से घिरे एक नाभिक का रूप धारण कर लेता है।

पुच्छलतारा (Comets)

"About Comets in Hindi" सूर्य से निकलनेवाली गैस सूर्य की विपरीत दिशा में अर्थात् धूमकेतु के केन्द्र से पीछे काफी दूर तक (करोड़ों किमी तक) फैल जाती है और इस प्रकार धूमकेतु की पूंछ बन जाती है, जो अंतरिक्ष में काफी दूर तक फैल जाती है।

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इस प्रकार, जब हमें धूमकेतु दिखाई पड़ता है। (अर्थात् जब सौर मंडल के अंदरुनी हिस्से में प्रवेश करता है) तो हमें नाभिक से निकलती लम्बी पूंछ दिखाई पड़ती है। यह पूंछ हमेशा सूर्य से विपरीत दिशा में रहती है। इसकी पूंछ में एक खतरनाक रसायन सायनोजेन (CN) होता है।

धूमकेतु या पुच्छल तारा (Comets) क्या है?
पहले धूमकेतुओं की कक्षा की जानकारी नहीं होने के कारण और कभीकभी दिखाई पड़ने के कारण इन्हें अपशकुन (bad omen) का प्रतीक माना जाता था । लेकिन खगोल विज्ञान के विकास के साथ ही ये भ्रॉतियाँ अब दूर हो गई हैं।

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