जीवन का गणित: भावों से धुल, शब्दों में घुल, व्यथा को गया भूल, मैं- अनिकुल (Hindi Edition)

पेशे से इंजीनियर लेखक ने जब जिंदगी को कागज़ पर उतारने की ठानी तो शब्दों के जो समीकरण बनें , भावों का जो मानकीकरण हुआ और उससे जीवन का जो गणित उभरा- ये रचनायें उस गणित की ‘प्रमेय’ हैं। रचनायें जो जीवन के नैराश्य को भी साहित्य के रंग में भर मनोरम बना देती हैं और जीवन के उत्सव को अप्रीतम !!रचनायें जो कल्पना का चित्रण करते हुए उसे यथार्थ से ज्यादा विश्वसनीय बना देती हैं और यथार्थ का चित्रण करते हुए उसे कल्पना से अधिक अकल्पनीय !!

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पेशे से इंजीनियर लेखक ने जब जिंदगी को कागज़ पर उतारने की ठानी तो शब्दों के जो समीकरण बनें , भावों का जो मानकीकरण हुआ और उससे जीवन का जो गणित उभरा- ये रचनायें उस गणित की ‘प्रमेय’ हैं। रचनायें जो जीवन के नैराश्य को भी साहित्य के रंग में भर मनोरम बना देती हैं और जीवन के उत्सव को अप्रीतम !!रचनायें जो कल्पना का चित्रण करते हुए उसे यथार्थ से ज्यादा विश्वसनीय बना देती हैं और यथार्थ का चित्रण करते हुए उसे कल्पना से अधिक अकल्पनीय !!

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