मिर्ज़ा ग़ालिब (CLASSICAL POEM)

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मिर्ज़ा ग़ालिब की शायरी अपने अद्वितीय साहित्यिक स्तर, भाषा सौंदर्य और रसपूर्णता के कारण पिछली एक सदी से चर्चित है.
ग़ालिब का कलाम गूढ़ होने के कारण इस के प्रायः तरहतरह के अर्थ निकाल लिए जाते हैं. हिंदी काव्यप्रेमी पाठकों को फ़ारसी या उर्दू का ज्ञान नहीं होने के कारण शेरों को समझने में बड़ी कठिनाई होती है.
हिंदी में पहली बार प्रकाशित इस दिवान में प्रत्येक शेर के साथसाथ उस का भावार्थ भी दिया गया है ताकि पाठक ग़ालिब की कविता का पूरी तरह रसास्वादन कर सकें.

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