सफ़र रिश्तों का (Hindi Edition)

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“सफर रिश्तों का” के लेखक ने विभिन्न कविताओं के माध्य्म से आज के भारतीय समाज में माता पिता और बच्चों के बीच रिश्तों में आ रही गिरावट का बहुत ही ममस्पर्शी और दिल छू लेने वाला चित्रण किया हैं। “इंसानियत शर्मसार हो गयी” में बूढ़े माँ बाप की व्यथा का भावुक वर्णन किया हैं। “मृत्यु बोध” एक बहुत ही भावुक कविता हैं जिसमें मृत्यु होने के बाद सारे रिश्तेदारों का आपके प्रति कितना लगाव हैं बहुत ही दिल छू लेने वाला वर्णन किया हैं। इसके अलावा आज के सामाजिक परिवेश पर बहुत सटीक कविताऐं हैं। पुस्तक सभी आयु वर्ग के लोगों को अवश्य ही पढ़नी चहिये। यह बच्चों की आंखे खोलने में सहायक होगी। यह पुस्तक सामाजिक मूल्यों, माँ बाप और बच्चों के बीच पुनःआत्मीय रिश्ते स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर सकती हैं।

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“सफर रिश्तों का” के लेखक ने विभिन्न कविताओं के माध्य्म से आज के भारतीय समाज में माता पिता और बच्चों के बीच रिश्तों में आ रही गिरावट का बहुत ही ममस्पर्शी और दिल छू लेने वाला चित्रण किया हैं। “इंसानियत शर्मसार हो गयी” में बूढ़े माँ बाप की व्यथा का भावुक वर्णन किया हैं। “मृत्यु बोध” एक बहुत ही भावुक कविता हैं जिसमें मृत्यु होने के बाद सारे रिश्तेदारों का आपके प्रति कितना लगाव हैं बहुत ही दिल छू लेने वाला वर्णन किया हैं। इसके अलावा आज के सामाजिक परिवेश पर बहुत सटीक कविताऐं हैं। पुस्तक सभी आयु वर्ग के लोगों को अवश्य ही पढ़नी चहिये। यह बच्चों की आंखे खोलने में सहायक होगी। यह पुस्तक सामाजिक मूल्यों, माँ बाप और बच्चों के बीच पुनःआत्मीय रिश्ते स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर सकती हैं।

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