Amar Shaheed Bhagat Singh

Amazon.in Price: 139.00 (as of 21/01/2020 03:29 PST- Details)

“प्रिय कुलतार, आज तुम्हारी आँखों में आँसू देखकर बहुत दु:ख हुआ। आज तुम्हारी बातों में बड़ा दर्द था। तुम्हारे आँसू मुझसे सहन नहीं होते। बरखुरदार, हिम्मत से शिक्षा प्राप्‍त करना और सेहत का खयाल रखना। हौसला रखना। और क्या कहूँ… ‘उसे यह फिक्र है हरदम, नया तर्जे जफा क्या है? हमें यह शौक देखें, सितम की इंतेहा क्या है? दहर से क्यों खफा रहें, चर्ख का क्यों गिला करें? सारा जहाँ अदू सही, आओ मुकाबला करें। कोई दम का मेहमान हूँ, ए अहले मह‌फ‌िल! चरागे सहर हूँ, बुझा चाहता हूँ। मेरी हवाओं में रहेगी, खयालों की बिजली यह मुश्त-ए-खाक हूँ, रहे, रहे न रहे।’ अच्छा, रुखसत। ‘खुश रहो अहले वतन हम तो सफर करते हैं।’ हौसले से रहना।” —भगत सिंह युवावस्था में ही ‘रष्‍ट्र सर्वोपरि’ का मंत्र जपकर जिसने भारत की स्वतंत्राता के लिए फाँसी के फंदे को चूम लिया और अपनी शहादत से युवाओं के लहू में देशभक्‍त‌ि का उबाल पैदा करके मिशन-ए-आजादी का महामंत्र फूँका, ऐसे महान् क्रांतिकारी एवं राष्‍ट्र-चिंतक अमर शहीद भगतसिंह की प्रेरणादायक जीवनी|

Category:

Description

About the Author

प्रतिष्‍ठ‌ित लेखक श्री महेश शर्मा का लेखन कार्य सन् 1983 में तब आरंभ हुआ, जब वे हाई स्कूल में अध्ययनरत थे। बुंदेलखंड विश्‍वविद्यालय, झाँसी से सन् 1989 में हिंदी में एम.ए. किया। उसके बाद कुछ वर्षों तक विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं के लिए संवाददाता, संपादक और प्रतिनिधि के रूप में कार्य किया। अब तक अनेक पत्र-पत्रिकाओं में उनकी 3, 000 से अधिक विविध विषयी रचनाएँ तथा मौलिक एवं संपादित 400 से अधिक पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। हिंदी लेखन के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए अनेक पुरस्कारों से सम्मानित, जिनमें प्रमुख हैं—नटराज कला संस्थान, झाँसी द्वारा ‘यूथ अवार्ड’ तथा ‘अंतर्धारा’ समाचार व फीचर सेवा, दिल्ली द्वारा ‘लेखक रत्‍न’ पुरस्कार। संप्रति: स्वतंत्र पत्रकार व लेखक।.

“प्रिय कुलतार, आज तुम्हारी आँखों में आँसू देखकर बहुत दु:ख हुआ। आज तुम्हारी बातों में बड़ा दर्द था। तुम्हारे आँसू मुझसे सहन नहीं होते। बरखुरदार, हिम्मत से शिक्षा प्राप्‍त करना और सेहत का खयाल रखना। हौसला रखना। और क्या कहूँ… ‘उसे यह फिक्र है हरदम, नया तर्जे जफा क्या है? हमें यह शौक देखें, सितम की इंतेहा क्या है? दहर से क्यों खफा रहें, चर्ख का क्यों गिला करें? सारा जहाँ अदू सही, आओ मुकाबला करें। कोई दम का मेहमान हूँ, ए अहले मह‌फ‌िल! चरागे सहर हूँ, बुझा चाहता हूँ। मेरी हवाओं में रहेगी, खयालों की बिजली यह मुश्त-ए-खाक हूँ, रहे, रहे न रहे।’ अच्छा, रुखसत। ‘खुश रहो अहले वतन हम तो सफर करते हैं।’ हौसले से रहना।” —भगत सिंह युवावस्था में ही ‘रष्‍ट्र सर्वोपरि’ का मंत्र जपकर जिसने भारत की स्वतंत्राता के लिए फाँसी के फंदे को चूम लिया और अपनी शहादत से युवाओं के लहू में देशभक्‍त‌ि का उबाल पैदा करके मिशन-ए-आजादी का महामंत्र फूँका, ऐसे महान् क्रांतिकारी एवं राष्‍ट्र-चिंतक अमर शहीद भगतसिंह की प्रेरणादायक जीवनी|

Reviews

There are no reviews yet.

Be the first to review “Amar Shaheed Bhagat Singh”

Your email address will not be published. Required fields are marked *

X