Banaras Talkies

बनारस टॉकीज़ साल 2015 का सबसे ज़्यादा चर्चित हिंदी उपन्यास है। साल 2016 और 2017 में भी ख़ूब पढ़े जाने का बल बनाए हुए है। सत्य व्यास का लिखा यह उपन्यास काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) के छात्रावासीय जीवन का जो रेखाचित्र खींचता है वो हिंदी उपन्यास लेखन में पहले कभी देखने को नहीं मिला। इस किताब की भाषा में वही औघड़पन तथा बनरासपन है जो इस शहर के जीवन में। सत्य व्यास ‘नई वाली हिंदी’ के सर्वाधिक लोकप्रिय लेखक हैं।

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this is the best book of college life,story is going on like, you can feel it as if this is your college life,however it is written for BHU but applying to all of college students and reminds nostalgia,some people think in the book full of grammatical errors,but the write made it deliberately,because this is the pure ‘banarsiya rang’ ,one who belongs to northern india,he can easily understand…this books not belongs to who want to read as a story,but who wants to feel the old memories of college best life..thanks for satya vyas to present the marvelous and fascinating story. –By gyanesh on 9th feb 2016

About the Author

मीडिया की नजर में-

-सत्य व्यास की कलम में नशा-सा है- दीपक दुआ, फिल्म समीक्षक
-यह उपन्यास अपनी शैली और कथानक की रफ्तार की वजह से अपनी ओर ध्यान खींचता है- इंडिया टुडे (हिंदी)
-साल की सबसे चर्चित किताब है बनारस टॉकीज- आउटलुक (हिंदी)
-किस्सों का जखीरा है बनारस टॉकीज- दैनिक भास्कर
-काशी को समझने की कोशिश है बनारस टॉकीज- IBN Live
-कॉलेज के दिनों की मौज-मस्ती और साथियों के साथ की जाने वाली चुहलबाजी की यादों को तरोताजा करना चाहते हैं तो इस उपन्यास को पढ़ सकते हैं- नवभारत टाइम्स
-छात्र-जीवन पर आधारित अच्छी किताबें अंग्रेजी में ही लिखी जा सकती हैं, इस मिथक को झारखंड के बोकारो में पले-बढ़े युवा लेखक ने तोड़ दिया है- प्रभात खबर
-कालेज के दिनों को तरोताजा करेगी बनारस टॉकीज- अमर उजाला
-Excellent start with fantastic end- Dr. Girish Chandra Mishra, BHU
-Refreshing to read a contemporary writer in Hindi- Manish Jha, ‘Matrubhoomi’, ‘Anwar’ fame filmmaker
-Congratulation for writing such an interesting book named ‘BANARAS TALKIES’- Gyan Sahay, Cinematographer, Director : Antakshari/Saregama/Bourn Vita Quiz on Zee TV
-काशी का अस्सी के बाद ऐसी टटकी भाषा और ऐसा निहंगपन इस किताब में देखने को मिला है- दैनिक जागरण

लेखक, सत्य व्यास के बारे में

अस्सी के दशक में बूढ़े हुए। नब्बे के दशक में जवान। इक्कीसवीं सदी के पहले दशक में बचपना गुजरा और कहते हैं कि नई सदी के दूसरे दशक में पैदा हुए हैं। अब जब पैदा ही हुए हैं तो खूब उत्पात मचा रहे हैं। चाहते हैं कि उन्हें कॉस्मोपॉलिटन कहा जाए। हालाँकि देश से बाहर बस भूटान गए हैं। पूछने पर बता नहीं पाते कि कहाँ के हैं। उत्तर प्रदेश से जड़ें जुड़ी हैं। २० साल तक जब खुद को बिहारी कहने का सुख लिया तो अचानक ही बताया गया कि अब तुम झारखंडी हो। उसमें भी खुश हैं। खुद जियो औरों को भी जीने दो के धर्म में विश्वास करते हैं और एक साथ कई-कई चीजें लिखते हैं। अंतर्मुखी हैं इसलिए फोन की जगह ईमेल पर ज्यादा मिलते हैं। हाल ही में छपा इनका दूसरा उपन्यास ‘दिल्ली दरबार’ ख़ूब नाम कमा रहा है।
ईमेल : authorsatya@gmail.com”

बनारस टॉकीज़ साल 2015 का सबसे ज़्यादा चर्चित हिंदी उपन्यास है। साल 2016 और 2017 में भी ख़ूब पढ़े जाने का बल बनाए हुए है। सत्य व्यास का लिखा यह उपन्यास काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) के छात्रावासीय जीवन का जो रेखाचित्र खींचता है वो हिंदी उपन्यास लेखन में पहले कभी देखने को नहीं मिला। इस किताब की भाषा में वही औघड़पन तथा बनरासपन है जो इस शहर के जीवन में। सत्य व्यास ‘नई वाली हिंदी’ के सर्वाधिक लोकप्रिय लेखक हैं।

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