Bankissa: Stories of Kingfisher;Stories of Kingfisher

किस्सा उस सोच से लेकर जिसने तुम्हें मानव बना दिया,उस षड्यंत्र तक का जिसने तुम्हें भगवान् बनने से रोक दिया।“मैं किंगफ़िशर हूँ, मेरे किस्से सुनोगे। किस्सा जंगल का, झील का, बादलों का और उनके बीच रहनेवाले अद्भुत् जीवों का। किस्सा हिंसक बाघ में छिपे शिष्टता का और डरपोक चूहे में व्याप्त साहस का। किस्सा बच्चे जननेवाले नरों का, दयालु जोंबियो का, मूल्यहीन दोगलों का। किस्सा उदार की अवहेलना का, उदंड की आराधना का। किस्सा शक्तिविहीन अधिकारों का, अभिशापयुक्त ताकत का। किस्सा तुम्हारे बंधकर मुक्ति पानेवाले जीवन का, किस्सा तुम्हें एकलौती पहचान देनेवाले मरण का। किस्सा नवविचारों के अंतिम हस्र का, किस्सा समाधानों से शुरू दुश्चक्र का। किस्सा मनुष्यता से अच्छी पशुता का और प्रजातंत्र से श्रेष्ठ अराजकता का। किस्सा उस सोच का जिसने तुम्हें बंदर से मानव बना दिया, किस्सा उस षड्यंत्र का जिसने तुम्हें भगवान् बनने से रोक दिया।” “जिनकी विलक्षणता किवदंती बनने की योग्यता रखती हो,जिनको जानना भर रोमांच के लिए पर्याप्त हो, वे आए हैं किस्सों के पात्र बनकर विश्व के इतिहास में पहलेपहल, सुनाने कुछ ऐसा,जिसे कहना सिर्फ उन्हें बदा है और सुनना सिर्फ हमें।”

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लेखक सुनील कुमार ‘सिंक्रेटिक’ के मन में शुरू से एक विश्वास घर कर गया है कि लोग अभिरुचि की चीजों के साथ जुड़ना चाहते हैं। वे रुचिकर किताबें ढूंढते रहते हैं और हाथ आए तो पढ़ना चाहते हैं। बस यही विश्वास इनकी ताकत बन गई और ये लिखते चले गए। अब बोलते हैं की मुझे बेधड़क पढ़िए। मेरा लिखा अच्छा या बुरा हो सकता है, उबाऊ नहीं।

किस्सा उस सोच से लेकर जिसने तुम्हें मानव बना दिया,उस षड्यंत्र तक का जिसने तुम्हें भगवान् बनने से रोक दिया।“मैं किंगफ़िशर हूँ, मेरे किस्से सुनोगे। किस्सा जंगल का, झील का, बादलों का और उनके बीच रहनेवाले अद्भुत् जीवों का। किस्सा हिंसक बाघ में छिपे शिष्टता का और डरपोक चूहे में व्याप्त साहस का। किस्सा बच्चे जननेवाले नरों का, दयालु जोंबियो का, मूल्यहीन दोगलों का। किस्सा उदार की अवहेलना का, उदंड की आराधना का। किस्सा शक्तिविहीन अधिकारों का, अभिशापयुक्त ताकत का। किस्सा तुम्हारे बंधकर मुक्ति पानेवाले जीवन का, किस्सा तुम्हें एकलौती पहचान देनेवाले मरण का। किस्सा नवविचारों के अंतिम हस्र का, किस्सा समाधानों से शुरू दुश्चक्र का। किस्सा मनुष्यता से अच्छी पशुता का और प्रजातंत्र से श्रेष्ठ अराजकता का। किस्सा उस सोच का जिसने तुम्हें बंदर से मानव बना दिया, किस्सा उस षड्यंत्र का जिसने तुम्हें भगवान् बनने से रोक दिया।” “जिनकी विलक्षणता किवदंती बनने की योग्यता रखती हो,जिनको जानना भर रोमांच के लिए पर्याप्त हो, वे आए हैं किस्सों के पात्र बनकर विश्व के इतिहास में पहलेपहल, सुनाने कुछ ऐसा,जिसे कहना सिर्फ उन्हें बदा है और सुनना सिर्फ हमें।”

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