Bhatka Hua Ek Parinda

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समाज में व्याप्त विसंगतियाँ, बुराइयाँ और समस्याएँ जब हृदय में काँटे-सी चुभने लगती हैं तो उससे उत्पन्न पीड़ा से लघुकथाओं का जन्म होता है। संग्रह में संकलित लघुकथाओं में व्यक्त पीड़ा ने यदि आपकी सुप्त संवेदनाओं को जगाकर सचेत कर दिया तो ये लघुकथाएँ सार्थक कही जाएँगी। और मुझे इनकी सार्थकता पर तनिक भी संदेह नहीं है। मुझे विश्वास है कि इनमें चित्रित नकारात्मकता जहाँ आपके हृदय को झकझोरेगी, व्यंग्य हँसने को मजबूर करेगा, वहीं सकारात्मक कोमल भावनाएँ हृदय को सहलाती-सी प्रतीत होंगी। – जयेन्द्र कुमार वर्मा।

Description

About the Author

11 मई, सन् 1968 ई. को जनपद फ़तेहपुर (उ.प्र.) में जन्मे जयेन्द्र कानपुर विश्वविद्यालय से हिन्दी विषय में परास्नातक हैं। वर्तमान में राष्ट्रकवि श्री सोहन लाल द्विवेदी जी की नगरी बिन्दकी में स्थित ‘नगर पालिका नेहरू इण्टर कॉलेज’ में ‘हिन्दी प्रवक्ता’ पद पर कार्यरत हैं। दैनिक जागरण, दैनिक ट्रिब्यून सहित देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में इनकी लगभग 250 लघुकथाएँ प्रकाशित हो चुकी हैं। कुछ लघुकथाएँ पुरस्कृत तथा उर्दू व पंजाबी में अनुदित हो चुकी हैं। एक लघुकथा-संग्रह ‘और सब ठीक है’ अयन प्रकाशन, नई दिल्ली से प्रकाशित हो चुका है। ‘भटका हुआ एक परिंदा’ इनका दूसरा लघुकथा-संग्रह है। लघुकथा, कहानी और उपन्यास इनकी प्रिय विधाएँ हैं।

समाज में व्याप्त विसंगतियाँ, बुराइयाँ और समस्याएँ जब हृदय में काँटे-सी चुभने लगती हैं तो उससे उत्पन्न पीड़ा से लघुकथाओं का जन्म होता है। संग्रह में संकलित लघुकथाओं में व्यक्त पीड़ा ने यदि आपकी सुप्त संवेदनाओं को जगाकर सचेत कर दिया तो ये लघुकथाएँ सार्थक कही जाएँगी। और मुझे इनकी सार्थकता पर तनिक भी संदेह नहीं है। मुझे विश्वास है कि इनमें चित्रित नकारात्मकता जहाँ आपके हृदय को झकझोरेगी, व्यंग्य हँसने को मजबूर करेगा, वहीं सकारात्मक कोमल भावनाएँ हृदय को सहलाती-सी प्रतीत होंगी। – जयेन्द्र कुमार वर्मा।

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