Chumbak Chikitsa (Hindi Edition)

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संसार की प्रधान चिकित्सा पद्धतियों का सीधा संबंध संसार की प्रधान सभ्यताओं से है, जैसे—भारत की आयुर्वेद, चीन की पारंपरिक (Traditional) चिकित्सा विधि, मिस्र और ईरान की यूनानी और रोम की एलोपैथी। वैसे एलोपैथी को प्रधान और अन्य सबको वैकल्पिक (Alternate) चिकित्सा पद्धतियों के रूप में मान्यता प्राप्त है। होम्योपैथी वैसे ही एक स्वतंत्र चिकित्सा पद्धति (Therapy) है, जैसे कि आयुर्वेद, यूनानी, चीनी चिकित्सा प्रणालियाँ हैं।संसार में आजकल लगभग 200 ऐसी वैकल्पिक चिकित्सा-पद्धतियाँ हैं, जिनका पूर्ण या आंशिक रूप से प्रयोग करके बहुत से सरल और जटिल रोगों का निदान किया जा रहा है और इनके परिणाम भी संतोषप्रद हैं। रोगी का रोग की पद्धति से कोई सरोकार नहीं होता। वह तो कम-से-कम समय में और कम खर्च करके ठीक होना चाहता है। उसे साधन से नहीं, साध्य से मतलब है। यदि डॉक्टर एक रोग को तो ठीक कर दे, परंतु इससे दूसरे अन्य लक्षण या रोग पैदा हो जाएँ तो ऐसा इलाज रोगी के किस काम का! एलोपैथी रोग को जल्दी ही समाप्त कर देती है, परंतु उसे जड़ से समाप्त नहीं करती। ऐसे में एक रोग का अंत किसी दूसरे नए रोग का कारण बन जाता है।यही कारण है कि लोग चुंबक चिकित्सा, एक्यूपंक्चर, एक्यूप्रेशर, योग, शियात्शू, प्राकृतिक चिकित्सा, जल चिकित्सा आदि को स्वीकारने, अपनाने और इस्तेमाल करने लगे हैं। हमारे विचार में सभी चिकित्सा-प्रणालियों में स्वकीय गुण और उपादेयता है, अन्यथा वे कभी की काल-कवलित हो गई होतीं।

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संसार की प्रधान चिकित्सा पद्धतियों का सीधा संबंध संसार की प्रधान सभ्यताओं से है, जैसे—भारत की आयुर्वेद, चीन की पारंपरिक (Traditional) चिकित्सा विधि, मिस्र और ईरान की यूनानी और रोम की एलोपैथी। वैसे एलोपैथी को प्रधान और अन्य सबको वैकल्पिक (Alternate) चिकित्सा पद्धतियों के रूप में मान्यता प्राप्त है। होम्योपैथी वैसे ही एक स्वतंत्र चिकित्सा पद्धति (Therapy) है, जैसे कि आयुर्वेद, यूनानी, चीनी चिकित्सा प्रणालियाँ हैं।संसार में आजकल लगभग 200 ऐसी वैकल्पिक चिकित्सा-पद्धतियाँ हैं, जिनका पूर्ण या आंशिक रूप से प्रयोग करके बहुत से सरल और जटिल रोगों का निदान किया जा रहा है और इनके परिणाम भी संतोषप्रद हैं। रोगी का रोग की पद्धति से कोई सरोकार नहीं होता। वह तो कम-से-कम समय में और कम खर्च करके ठीक होना चाहता है। उसे साधन से नहीं, साध्य से मतलब है। यदि डॉक्टर एक रोग को तो ठीक कर दे, परंतु इससे दूसरे अन्य लक्षण या रोग पैदा हो जाएँ तो ऐसा इलाज रोगी के किस काम का! एलोपैथी रोग को जल्दी ही समाप्त कर देती है, परंतु उसे जड़ से समाप्त नहीं करती। ऐसे में एक रोग का अंत किसी दूसरे नए रोग का कारण बन जाता है।यही कारण है कि लोग चुंबक चिकित्सा, एक्यूपंक्चर, एक्यूप्रेशर, योग, शियात्शू, प्राकृतिक चिकित्सा, जल चिकित्सा आदि को स्वीकारने, अपनाने और इस्तेमाल करने लगे हैं। हमारे विचार में सभी चिकित्सा-प्रणालियों में स्वकीय गुण और उपादेयता है, अन्यथा वे कभी की काल-कवलित हो गई होतीं।

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