Hind Swaraj

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‘हिन्द स्वराज’ स्वतंत्रता – प्राप्ति के लगभग चालीस वर्ष पूर्व ‘स्वदेशी के सिद्धांत’ पर महात्मा गांधी द्वारा प्रस्तुत स्वतंत्र भारत की राजनीतिक-आर्थिक, सामाजिक-सांस्कृतिक, शैक्षिक-नैतिक व्यवस्था की पूर्ण परिकल्पना है। यह परिकल्पना महात्मा जी ने तेजी से बदल रहे विश्व- परिदृश्य में भारत के भविष्य पर गंभीर विचार-मंथन के बाद अपनी अंतरात्मा के आदेश पर प्रस्तुत की थी। इस छोटी सी पुस्तक में भारत से संबंधित जो भी, जितनी भी समस्याएं है, भारत को एक आदर्श राष्ट्र बनाने के मार्ग में जो – जो कठिनाईयां है या हो सकती है उन सबके युक्तिसंगत समाधान सुझाये गए है। महात्मा गांधी विश्वव्यापी प्रभाव वाले व्यक्ति रहे है। वे सत्य के साधक ही नहीं,सत्य के प्रयोक्ता भी, और अहिंसा के अपराजेय सेनानी भी रहे है, इसलिए उनकी अभिव्यक्तियाँ विश्व – मन को छूती है। ‘हिन्द स्वराज’ उनके सत्य-सागर-मंथन की प्रथम उपलब्धि है। इसीलिए ‘गागर में सागर’ की कहावत को चरितार्थ करने वाली इस पुस्तक को भारतीय जनमानस और ‘मानवता के प्रति संवेदनशील विचारको की गीता’ कहा गया है, और ऐसा कहना सर्वथा सार्थक है|

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