Jammu Kashmir Ke Jannayak Maharaja Hari Singh

Amazon.in Price: 153.00 (as of 21/01/2020 03:29 PST- Details)

जमू-कश्मीर के अंतिम शासक और उत्तर भारत की प्राकृतिक सीमाओं को पुनः स्थापित करने का सफल प्रयास करनेवाले महाराजा गुलाब सिंह के वंशज महाराजा हरि सिंह पर शायद यह अपनी प्रकार की पहली पुस्तक है, जिसमें उनका समग्र मूल्यांकन किया गया है। महाराजा हरि सिंह पर कुछ पक्ष यह आरोप लगाते हैं कि वे अपनी रियासत को आजाद रखना चाहते थे और इसीलिए उन्होंने 15 अगस्त, 1947 से पहले रियासत को भारत की प्रस्तावित संघीय सांविधानिक व्यवस्था का हिस्सा नहीं बनने दिया; जबकि जमीनी सच्चाई इसके बिल्कुल विपरीत है। इस पुस्तक में पर्याप्त प्रमाण एकत्रित किए गए हैं कि महाराजा हरि सिंह काफी पहले से ही रियासत को भारत की सांविधानिक व्यवस्था का हिस्सा बनाने का प्रयास करते रहे। पुस्तक में उन सभी उपलब्ध तथ्यों की नए सिरे से व्याख्या की गई है, ताकि महाराजा हरि सिंह की भूमिका को सही परिप्रेक्ष्य में समझा जा सके। महाराजा हरि सिंह पर पूर्व धारणाओं से हटकर लिखी गई यह पहली पुस्तक है, जो जम्मू-कश्मीर के अनछुए पहलुओं पर प्रकाश डालती है।.

Category:

Description

About the Author

डॉ. कुलदीप चंद अग्निहोत्री की शिक्षा सिक्ख नेशनल कॉलेज बंगा, लायलपुर खालसा कॉलेज जालंधर और पंजाब विश्वविद्यालय चंडीगढ़ में हुई। मूलतः वे अध्यापक हैं, पर कुछ समय वकालत भी की। पत्रकारिता से भी जुड़े हुए हैं। हिमाचल प्रदेश में लंबे अरसे तक बी.बी.एन. स्नातकोत्तर महाविद्यालय, चकमोह के प्रिंसिपल रहे, हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के धर्मशाला परिसर के निदेशक रहे। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में ही आंबेडकर पीठ के अध्यक्ष के पद पर भी कार्य किया। पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड के उपाध्यक्ष भी रहे। पंजाब में भारतीय जनसंघ के विभाग संगठन मंत्री और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् के प्रादेशिक सचिव का कार्यभार भी सँभाला। आपातकाल का विरोध करने पर जेल यात्रा भी करनी पड़ी। इसी प्रकार तिब्बत की स्वतंत्रता के पक्ष में इंडिया गेट दिल्ली में प्रदर्शन करने पर बंदी बनाए गएा। वर्तमान में राष्ट्रीय सिख संगत के अखिल भारतीय उपाध्यक्ष, भारत-तिब्बत सहयोग मंच के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष, हिंदुस्थान समाचार न्यूज एजेंसी के निदेशक हैं। हिंदुस्थान समाचार के संस्थापक दादा साहिब आपटे के प्रथम जीवनीकार डॉ. अग्निहोत्री की पंद्रह पुस्तकें छप चुकी हैं। दुनिया के अनेक देशों की यात्रा कर चुके अग्निहोत्री आजकल शताब्दियों पहले बंद हो चुकी अंगकोर मंदिर की तीर्थ यात्रा को म्यांमार, थाईलैंड के स्थल मार्ग से पुनः शुरू करवाने के लिए प्रयासरत हैं। इसी प्रकार तवांग तीर्थ यात्रा के आयोजक भी हैं। संप्रति हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय धर्मशाला के कुलपति हैं।.

जमू-कश्मीर के अंतिम शासक और उत्तर भारत की प्राकृतिक सीमाओं को पुनः स्थापित करने का सफल प्रयास करनेवाले महाराजा गुलाब सिंह के वंशज महाराजा हरि सिंह पर शायद यह अपनी प्रकार की पहली पुस्तक है, जिसमें उनका समग्र मूल्यांकन किया गया है। महाराजा हरि सिंह पर कुछ पक्ष यह आरोप लगाते हैं कि वे अपनी रियासत को आजाद रखना चाहते थे और इसीलिए उन्होंने 15 अगस्त, 1947 से पहले रियासत को भारत की प्रस्तावित संघीय सांविधानिक व्यवस्था का हिस्सा नहीं बनने दिया; जबकि जमीनी सच्चाई इसके बिल्कुल विपरीत है। इस पुस्तक में पर्याप्त प्रमाण एकत्रित किए गए हैं कि महाराजा हरि सिंह काफी पहले से ही रियासत को भारत की सांविधानिक व्यवस्था का हिस्सा बनाने का प्रयास करते रहे। पुस्तक में उन सभी उपलब्ध तथ्यों की नए सिरे से व्याख्या की गई है, ताकि महाराजा हरि सिंह की भूमिका को सही परिप्रेक्ष्य में समझा जा सके। महाराजा हरि सिंह पर पूर्व धारणाओं से हटकर लिखी गई यह पहली पुस्तक है, जो जम्मू-कश्मीर के अनछुए पहलुओं पर प्रकाश डालती है।.

Reviews

There are no reviews yet.

Be the first to review “Jammu Kashmir Ke Jannayak Maharaja Hari Singh”

Your email address will not be published. Required fields are marked *

X