Lokpriya Shayar Aur Unki Shayari: Sahir Ludhianavi (Hindi)

साहिर ने जब लिखना शुरू किया तब इक़बाल, जोश, फैज़, फ़िराक़, वगैरह शायरों की तूती बोलती थी, पर उन्होंने अपना जो विशेष लहज़ा और रूख अपनाया, उससे न सिर्फ उन्होंने अपनी अलग जगह बना ली बल्कि वे भी शायरी की दुनियाpar छ गये। प्रेम के दुःख-दर्द के अलावा समाज की विषमताओं के प्रति जो आक्रोश हमें unki शायरी में मिलता है, वह उन्होंने अपना विशिष्ट स्थान दिलाता है।

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साहिर ने जब लिखना शुरू किया तब इक़बाल, जोश, फैज़, फ़िराक़, वगैरह शायरों की तूती बोलती थी, पर उन्होंने अपना जो विशेष लहज़ा और रूख अपनाया, उससे न सिर्फ उन्होंने अपनी अलग जगह बना ली बल्कि वे भी शायरी की दुनियाpar छ गये। प्रेम के दुःख-दर्द के अलावा समाज की विषमताओं के प्रति जो आक्रोश हमें unki शायरी में मिलता है, वह उन्होंने अपना विशिष्ट स्थान दिलाता है।

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