Meri Parchhai (Hindi Edition)

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महिलाएं इस श्रृष्टि की सृजनकर्ता हैं| उनके बिना इस संसार की कल्पना करना भी असंभव है| पर ये तो हम सभी जानते हैं कि उनका जीवन अपने आप में हीं एक बड़ी चुनौती है| उनके उपर न केवल खुद की, बल्कि कई लोगों की जिम्मेदारियां होती हैं| यह बात कहना अतिशयोक्ति नहीं होगी कि उनकी सोंच ही हमारे समाज की दिशा तय करती है| ऐसे में कई माँ अपनी खुशियों और इच्छाओं का त्याग कर अपने बच्चों को सिंचित करने में जुट जाती हैं| वे अपने अधूरे सपनों को अपने बच्चों, ख़ास कर अपनी बेटियों के माध्यम से पूरा होता हुआ देख कर अधिक खुश होती हैं| मेरी यह पुस्तक “मेरी परछाई”,ऐसी ही माताओं को समर्पित है, जो खुद को हमेशा अपने बच्चों में खोजने की कोशिश करती हैं| इन्होंने अपने त्याग से हमारे भविष्य की पीढ़ियों को संवारा है तथा समाज को बेहतर बनाने में मदद की है| क्योंकि माँ शब्द खुद में अनेक भावनाओं का संग्रह है, इसलिए इस किताब में विभिन्न भावनाओं का समावेश करने की कोशिश की गयी है|

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महिलाएं इस श्रृष्टि की सृजनकर्ता हैं| उनके बिना इस संसार की कल्पना करना भी असंभव है| पर ये तो हम सभी जानते हैं कि उनका जीवन अपने आप में हीं एक बड़ी चुनौती है| उनके उपर न केवल खुद की, बल्कि कई लोगों की जिम्मेदारियां होती हैं| यह बात कहना अतिशयोक्ति नहीं होगी कि उनकी सोंच ही हमारे समाज की दिशा तय करती है| ऐसे में कई माँ अपनी खुशियों और इच्छाओं का त्याग कर अपने बच्चों को सिंचित करने में जुट जाती हैं| वे अपने अधूरे सपनों को अपने बच्चों, ख़ास कर अपनी बेटियों के माध्यम से पूरा होता हुआ देख कर अधिक खुश होती हैं| मेरी यह पुस्तक “मेरी परछाई”,ऐसी ही माताओं को समर्पित है, जो खुद को हमेशा अपने बच्चों में खोजने की कोशिश करती हैं| इन्होंने अपने त्याग से हमारे भविष्य की पीढ़ियों को संवारा है तथा समाज को बेहतर बनाने में मदद की है| क्योंकि माँ शब्द खुद में अनेक भावनाओं का संग्रह है, इसलिए इस किताब में विभिन्न भावनाओं का समावेश करने की कोशिश की गयी है|

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