Raat Ki Dhoop Mein (Hindi Edition)

जैसे हम रोज़मर्रा के और ज़रूरी काम करते हैं वैसे ही विचारों की अभिव्यक्ति एक ज़रूरी कार्य है। लेकिन कई बार प्रसन्नता, दुख अथवा क्रोध के कई ऐसे भाव होते हैं जो सिर्फ़ दिल में दबकर रह जाते हैं। यह पुस्तक ऐसे ही तमाम भावों को उजागर करने का एक ज़रिया है। मुझे ऐसा लगता है कि आप सभी इन भावों से अवश्य जुड़ पाएँगे और अगर ऐसा सचमुच हुआ तो मुझे अत्यंत प्रसन्नता होगी। ‘रात की धूप में’ यूँ तो एक असंभव-सी बात लगती है लेकिन अगर ग़ौर से देखें तो समूचे विश्व में कहीं दिन और कहीं रात हमेशा ही रहती है। यह पुस्तक कोशिश है तमाम नकारात्मकताओं में सकारात्मकता तलाशना, गहन अँधेरे में उजाले की एक किरण तलाशना, और असंभव में भी एक संभावना तलाशना। आशा करता हूँ आपको पढ़ने में भी उतना ही आनन्द आएगा जितना मुझे लिखने में आया है।— पीयूष सिंह

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जैसे हम रोज़मर्रा के और ज़रूरी काम करते हैं वैसे ही विचारों की अभिव्यक्ति एक ज़रूरी कार्य है। लेकिन कई बार प्रसन्नता, दुख अथवा क्रोध के कई ऐसे भाव होते हैं जो सिर्फ़ दिल में दबकर रह जाते हैं। यह पुस्तक ऐसे ही तमाम भावों को उजागर करने का एक ज़रिया है। मुझे ऐसा लगता है कि आप सभी इन भावों से अवश्य जुड़ पाएँगे और अगर ऐसा सचमुच हुआ तो मुझे अत्यंत प्रसन्नता होगी। ‘रात की धूप में’ यूँ तो एक असंभव-सी बात लगती है लेकिन अगर ग़ौर से देखें तो समूचे विश्व में कहीं दिन और कहीं रात हमेशा ही रहती है। यह पुस्तक कोशिश है तमाम नकारात्मकताओं में सकारात्मकता तलाशना, गहन अँधेरे में उजाले की एक किरण तलाशना, और असंभव में भी एक संभावना तलाशना। आशा करता हूँ आपको पढ़ने में भी उतना ही आनन्द आएगा जितना मुझे लिखने में आया है।— पीयूष सिंह

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