Ruk Jaana Nahin (रुक जाना नहीं)

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यह किताब प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले हिंदी मीडियम के युवाओं को केंद्र में रखकर लिखी गई है।इस किताब में कोशिश की गई है कि हिंदी पट्टी के युवाओं की ज़रूरतों के मुताबिक़ कैरियर और ज़िंदगी दोनों की राह में उनकी सकारात्मक रूप से मदद की जाए। इस किताब के छोटे-छोटे लाइफ़ मंत्र इस किताब को खास बनाते हैं। ये छोटे-छोटे मंत्र जीवन में बड़ा बदलाव लाने की क्षमता रखते हैं।इस किताब की कुछ और ख़ासियतें भी हैं। इसमें पर्सनैलिटी डेवलपमेंट के प्रैक्टिकल नुस्ख़ों के साथ स्ट्रेस मैनेजमेंट, टाइम मैनेजमेंट पर भी विस्तार से बात की गई है। चिंतन प्रक्रिया में छोटे-छोटे बदलाव लाकर अपने कैरियर और ज़िंदगी को काफ़ी बेहतर बनाया जा सकता है। विद्यार्थियों के लिए रीडिंग और राइटिंग स्किल को सुधारने पर भी इस किताब में बात की गई है। कुल मिलाकर किताब में कोशिश की गई है कि सरल और अपनी-सी लगने वाली भाषा में युवाओं के मन को टटोलकर उनके मन के ऊहापोह और उलझनों को सुलझाया जा सके।इस मोटिवेशनल किताब में असफलता को हैंडल करने और सफलता की राह पर बढ़ते जाने कुछ नुस्ख़े भी सुझाए हैं। ऐसे 26 युवाओं की सफलता की शानदार कहानियाँ भी उन्हीं की ज़ुबानी इस किताब के अंत में शामिल हैं, जिन्होंने तमाम प्रतिकूलताओं के बावजूद ‘रुक जाना नहीं’ का मंत्र अपनाकर सफलता की राह बनाई और युवाओं के प्रेरणास्त्रोत बने।

Description

About the Author

गाँवों- छोटे शहरों से मन में बड़ी उम्मीदें लिए बड़े शहरों का रूख करने वाले हिंदी पट्टी के लाखों युवाओं के मन में कुछ बड़ा कर दिखाने का सपना पल रहा होता है। ऐसा ही एक बड़ा सपना निशान्त ने देखा और ‘हिंदी मीडियम’ से होने के बाद भी ऊँची रैंक के साथ उस सपने को साकार कर दिखाया।

UPSC परीक्षा में हिंदी मीडियम के टॉपर निशान्त जैन का जन्म यू.पी. के मेरठ में एक साधारण परिवार में हुआ। मेरठ कॉलेज से एम.ए. और D.U. से एम.फिल. के बाद दो साल लोक सभा सचिवालय में नौकरी भी की। 2014 की सिविल सेवा परीक्षा में उन्हें 13वीं रैंक मिली और वह हिंदी मीडियम के ‘यूथ आइकन’ बनकर उभरे।

IAS की तैयारी के लिए प्रभात प्रकाशन से उनकी बेस्टसेलर किताब ‘मुझे बनना है UPSC टॉपर’हिंदी, इंग्लिश और मराठी भाषाओं में लोकप्रिय है। नेशनल बुक ट्रस्ट से उनकी किताब ‘राजभाषा के रूप में हिंदी’ प्रकाशित है। उन्होंने निबंध के पेपर पर ‘अक्षर’ (राजकमल प्रकाशन) से प्रकाशित ‘सिविल सेवा परीक्षा के लिए निबंध’ किताब का सम्पादन भी किया है।

यूट्यूब/ सोशल मीडिया पर उनके लेक्चर/ इंटरव्यू काफ़ी लोकप्रिय हुए हैं। कविताएँ/ ब्लॉग लिखने और युवाओं से संवाद में रुचि रखने वाले निशान्त 2015 बैच के IAS अधिकारी हैं।

यह किताब प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले हिंदी मीडियम के युवाओं को केंद्र में रखकर लिखी गई है।इस किताब में कोशिश की गई है कि हिंदी पट्टी के युवाओं की ज़रूरतों के मुताबिक़ कैरियर और ज़िंदगी दोनों की राह में उनकी सकारात्मक रूप से मदद की जाए। इस किताब के छोटे-छोटे लाइफ़ मंत्र इस किताब को खास बनाते हैं। ये छोटे-छोटे मंत्र जीवन में बड़ा बदलाव लाने की क्षमता रखते हैं।इस किताब की कुछ और ख़ासियतें भी हैं। इसमें पर्सनैलिटी डेवलपमेंट के प्रैक्टिकल नुस्ख़ों के साथ स्ट्रेस मैनेजमेंट, टाइम मैनेजमेंट पर भी विस्तार से बात की गई है। चिंतन प्रक्रिया में छोटे-छोटे बदलाव लाकर अपने कैरियर और ज़िंदगी को काफ़ी बेहतर बनाया जा सकता है। विद्यार्थियों के लिए रीडिंग और राइटिंग स्किल को सुधारने पर भी इस किताब में बात की गई है। कुल मिलाकर किताब में कोशिश की गई है कि सरल और अपनी-सी लगने वाली भाषा में युवाओं के मन को टटोलकर उनके मन के ऊहापोह और उलझनों को सुलझाया जा सके।इस मोटिवेशनल किताब में असफलता को हैंडल करने और सफलता की राह पर बढ़ते जाने कुछ नुस्ख़े भी सुझाए हैं। ऐसे 26 युवाओं की सफलता की शानदार कहानियाँ भी उन्हीं की ज़ुबानी इस किताब के अंत में शामिल हैं, जिन्होंने तमाम प्रतिकूलताओं के बावजूद ‘रुक जाना नहीं’ का मंत्र अपनाकर सफलता की राह बनाई और युवाओं के प्रेरणास्त्रोत बने।

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