Shayad Ab Bhi Zinda Hoon (Hindi Edition)

‘शायद अब भी ज़िंदा हूँ’ सफ़र है आपकी ज़िन्दगी के गुज़रे हुए पड़ावों का। यह सफ़र है उन लम्हों को खोजने का जिन्हें आप किसी आले (शेल्फ़) के अख़बार के नीचे रखकर भूल गए हैं। वैसे तो यह कविता-संग्रह है लेकिन इस बयार ने उम्र के हर पड़ाव को छूते हुए उसकी महक अपने में समेट ली है और अब जब यह बयार आपको छूकर गुज़रेगी तो एक पूरी कहानी बयाँ करेगी। इसमें कहीं घुटने चलती तुकबंदियाँ हैं तो कहीं कॉलेज की मस्तियाँ। कहीं पहले प्यार की पहली चोट की पहली ग़ज़ल है तो कहीं घर से दूर नौकरी करने की मजबूरी की टीस और कहीं अब तक के रास्ते को निहार आगे के पथ का चिंतन है। तो चलिए इस सफ़र पर और ढूँढिए उन वजहों को जो जीते चले जाने के बीच आपको ज़िंदा होने का आभास कराएँ। फिर मुलाक़ात होगी शायद अभी ज़िंदा हूँ के किसी पड़ाव पर…

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‘शायद अब भी ज़िंदा हूँ’ सफ़र है आपकी ज़िन्दगी के गुज़रे हुए पड़ावों का। यह सफ़र है उन लम्हों को खोजने का जिन्हें आप किसी आले (शेल्फ़) के अख़बार के नीचे रखकर भूल गए हैं। वैसे तो यह कविता-संग्रह है लेकिन इस बयार ने उम्र के हर पड़ाव को छूते हुए उसकी महक अपने में समेट ली है और अब जब यह बयार आपको छूकर गुज़रेगी तो एक पूरी कहानी बयाँ करेगी। इसमें कहीं घुटने चलती तुकबंदियाँ हैं तो कहीं कॉलेज की मस्तियाँ। कहीं पहले प्यार की पहली चोट की पहली ग़ज़ल है तो कहीं घर से दूर नौकरी करने की मजबूरी की टीस और कहीं अब तक के रास्ते को निहार आगे के पथ का चिंतन है। तो चलिए इस सफ़र पर और ढूँढिए उन वजहों को जो जीते चले जाने के बीच आपको ज़िंदा होने का आभास कराएँ। फिर मुलाक़ात होगी शायद अभी ज़िंदा हूँ के किसी पड़ाव पर…

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