Swadeshi Chikitsa

मौजूदा हालात कुछ ऐसे हैं कि आधुनिक चिकित्सा विज्ञानी जिस रफ्तार से नई-नई दवाइयाँ ईजाद कर रहे हैं, नई-नई बीमारियाँ उससे कहीं ज्यादा तेजी से पैदा हो रही हैं। दरअसल यह पुस्तक देशी चिकित्सा की तरफ लोगों का ध्यान आकर्षित करने के विशेष उद्देश्य से लिखी गई है। पुस्तक में अधिकतर ऐसे ही नुस्खों को शामिल करने का प्रयास किया गया है, जो सरलता से उपलब्ध हो जाएँ तथा घर बैठे ही बनाए जा सकें। ये सभी नुस्खे ऐसे हैं, जो विभिन्न चिकित्सकों व प्रबुद्ध लोगों द्वारा आजमाए जा चुके हैं और कारगर सिद्ध हुए हैं। वास्तव में इन नुस्खों का आहार-विहार के साथ प्रयोग करने से कई स्थितियों में अस्पतालों और डॉक्टरों के चक्कर लगाने की मुसीबतों से बचा जा सकता है। स्वास्थ्य संबंधी कई परेशानियाँ, जो हजारोें रुपए गँवा चुकने के बाद भी जस-की-तस बनी रह जाती हैं, वे मात्र चंद रुपयों की लागतवाले इन नुस्खों से ठीक की जा सकती हैं। भारतीय चिकित्सा विज्ञान का मर्म समझाती है यह पुस्तक। विश्वास है कि आमजन को अपनी सेहत का खयाल रखने में इससे भरपूर मदद मिलेगी।.

Description

About the Author

जन्म: 10 जुलाई, 1970, अंबेडकर नगर (उ.प्र.)। प्रतिष्ठित पत्रकार और समाजकर्मी। उन कुछ महत्त्वपूर्ण लोगों में एक, जिन्होंने स्वतंत्र भारत में पहली बार बहुराष्ट्रीय उपनिवेश के खिलाफ आवाज उठाते हुए अस्सी के दशक के उत्तरार्ध में स्वदेशी-स्वावलंबन का आंदोलन पुनः शुरू किया। उनके लिखे की अनुगूँज संसद् और विधानसभाओं तक भी पहुँची। वैकल्पिक चिकित्सा, समाज-व्यवस्था, भाषा, संस्कृति, अध्यात्म आदि विषयों में रुचि। असाध्य समझी जानेवाली कुछ बीमारियों के शिकार हुए तो वैकल्कि चिकित्सा के अध्येता बने और अपनी चिकित्सा खुद की। नब्बे के दशक की प्रतिष्ठित फीचर सर्विस ‘स्वदेशी संवाद सेवा’ के आप संस्थापक संपादक रहे। बहुराष्ट्रीय उपनिवेशवाद पर बहस की शुरुआत करनेवाली वैचारिक पत्रिका ‘नई आजादी उद्घोष’ के भी संपादक और सलाहकार संपादक रहे। व्यावसायिक पत्रकारिता के तौर पर विभिन्न अखबारों व न्यूज एजेंसियों के लिए खबरनवीसी करते हुए फिलहाल हिंदुस्तान टाइम्स समूह से जुड़े हुए हैं। कृतियाँ: ‘सफल लेखन के सूत्र’; ‘हिंदी की वर्तनी’ (पुरस्कृत); ‘अच्छी हिंदी कैसे लिखें’; ‘स्वदेशी चिकित्सा’; ‘सौंदर्य निखार’; ‘स्वतंत्र भारत की हिंदी पत्रकारिता: इलाहाबाद जिला’; ‘साप्ताहिक हिंदुस्तान: एक अध्ययन’; ‘दैनिक हिंदुस्तान: एक अध्ययन’ (शोध-प्रबंध), ‘पत्रकारिता के युग निर्माता: प्रभाष जोशी’। इ-मेल: santsameer@gmail.com.

मौजूदा हालात कुछ ऐसे हैं कि आधुनिक चिकित्सा विज्ञानी जिस रफ्तार से नई-नई दवाइयाँ ईजाद कर रहे हैं, नई-नई बीमारियाँ उससे कहीं ज्यादा तेजी से पैदा हो रही हैं। दरअसल यह पुस्तक देशी चिकित्सा की तरफ लोगों का ध्यान आकर्षित करने के विशेष उद्देश्य से लिखी गई है। पुस्तक में अधिकतर ऐसे ही नुस्खों को शामिल करने का प्रयास किया गया है, जो सरलता से उपलब्ध हो जाएँ तथा घर बैठे ही बनाए जा सकें। ये सभी नुस्खे ऐसे हैं, जो विभिन्न चिकित्सकों व प्रबुद्ध लोगों द्वारा आजमाए जा चुके हैं और कारगर सिद्ध हुए हैं। वास्तव में इन नुस्खों का आहार-विहार के साथ प्रयोग करने से कई स्थितियों में अस्पतालों और डॉक्टरों के चक्कर लगाने की मुसीबतों से बचा जा सकता है। स्वास्थ्य संबंधी कई परेशानियाँ, जो हजारोें रुपए गँवा चुकने के बाद भी जस-की-तस बनी रह जाती हैं, वे मात्र चंद रुपयों की लागतवाले इन नुस्खों से ठीक की जा सकती हैं। भारतीय चिकित्सा विज्ञान का मर्म समझाती है यह पुस्तक। विश्वास है कि आमजन को अपनी सेहत का खयाल रखने में इससे भरपूर मदद मिलेगी।.

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