Zindagi Unlimited

वह कोई साधारण लड़की नहीं थी, बल्कि बहुत अलग और दिलचस्प लड़की थी। वह आज भी जिंदगी को पूरी तरह से जीने में क करती है और एक भी पल ऐसा नहीं जाने देती, जिसका वह मजा न लेती हो। वह विकलांगता (एस.एम.ए.) से पीडि़त तो थी, लेकिन इसमें वह कुछ नहीं कर सकती थी और सोचने तथा बोलने के अलावा, वह उन बच्चों की तरह थी, जो अपनी सारी जरूरतों के लिए अपनी माताओं पर निर्भर होते हैं। वह भी दूसरों पर निर्भर थी, लेकिन उसने अपनी विकलांगता को अपनी खुशी की राह में कभी आड़े नहीं आने दिया। उसे खुद नहीं पता था कि खुदा ने आखिरकार उसे बनाने में और उसे सुंदर लड़की के रूप में बड़ा करने में कुछ समय लगाया होगा। उसने कभी अपनी खूबसूरती पर ध्यान नहीं दिया। हालाँकि बाद में, उसे दूसरों से ही यह पता लगा। लोग उसकी तारीफ करते थे और उसे सराहते थे, जिससे उसे क हुआ कि वह सबसे खूबसूरत इनसानों में से एक है। वह एक लाल गुलाब की तरह है, जिसमें खुदा ने सुंदर सुगंध भर दी है। एक दिव्यांग लड़की की प्रेरणाप्रद कहानी कि कैसे विषम परिस्थितियों में उसने हिम्मत न हारकर, अपनी अद्भुत जिजीविषा के बल पर जिंदगी को मजे से जीया और अपनी शारीरिक अक्षमताओं को बाधा नहीं बनने दिया|

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जीनत आरा का जन्म 18 अप्रैल, 1987 में लखनऊ में हुआ। उन्हें स्पाइनल मस्क्युलर एट्रोफी है, जिसका पता तब चला, जब वह केवल आठ महीने की थीं। रीढ़ की हड्डी की इस तकलीफ के बावजूद उन्होंने माता भागवंती चड्ढा निकेतन से स्कूली शिक्षा प्राप्त की तथा एन.आई.ओ.एस. से 10वीं व 12वीं की परीक्षा दी। सम्मान व उप्लब्धियाँ: नोएडा के डी.एम. श्री एन.पी. सिंह द्वारा महिला शिक्षा और सुरक्षा सम्मान; रचनात्मकता कार्यों में उत्कृष्ट योगदान हेतु स्पेश्यली एबल्ड अचीवर्स अवॉर्ड 2015; उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री श्री अखिलेश यादव द्वारा रानी लक्ष्मीबाई वीरता सम्मान 2016; जिला स्तर पर वीरता पुरस्कार 2016; ‘डिस्ट्रिक्ट आइकॉन’ के टाइटल से सम्मानित; एस.आर.एल. डायग्नॉस्टिक द्वारा ॑वूमन ऑफ सब्स्टांस: सीजन 3’ के टाइटल से सम्मानित। जीनत आरा ने चुनाव एवं मतदाता जागरूकता के विषय पर बनी एक शॉर्ट फिल्म में मुख्य भूमिका निभाई है। उन्होंने स्कूल के दिनों में भी विभिन्न कला प्रतियोगिताओं में कई पुरस्कार जीते हैं|

वह कोई साधारण लड़की नहीं थी, बल्कि बहुत अलग और दिलचस्प लड़की थी। वह आज भी जिंदगी को पूरी तरह से जीने में क करती है और एक भी पल ऐसा नहीं जाने देती, जिसका वह मजा न लेती हो। वह विकलांगता (एस.एम.ए.) से पीडि़त तो थी, लेकिन इसमें वह कुछ नहीं कर सकती थी और सोचने तथा बोलने के अलावा, वह उन बच्चों की तरह थी, जो अपनी सारी जरूरतों के लिए अपनी माताओं पर निर्भर होते हैं। वह भी दूसरों पर निर्भर थी, लेकिन उसने अपनी विकलांगता को अपनी खुशी की राह में कभी आड़े नहीं आने दिया। उसे खुद नहीं पता था कि खुदा ने आखिरकार उसे बनाने में और उसे सुंदर लड़की के रूप में बड़ा करने में कुछ समय लगाया होगा। उसने कभी अपनी खूबसूरती पर ध्यान नहीं दिया। हालाँकि बाद में, उसे दूसरों से ही यह पता लगा। लोग उसकी तारीफ करते थे और उसे सराहते थे, जिससे उसे क हुआ कि वह सबसे खूबसूरत इनसानों में से एक है। वह एक लाल गुलाब की तरह है, जिसमें खुदा ने सुंदर सुगंध भर दी है। एक दिव्यांग लड़की की प्रेरणाप्रद कहानी कि कैसे विषम परिस्थितियों में उसने हिम्मत न हारकर, अपनी अद्भुत जिजीविषा के बल पर जिंदगी को मजे से जीया और अपनी शारीरिक अक्षमताओं को बाधा नहीं बनने दिया|

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